समाज में मानसिक रुप से पीडि़तों के साथ हो सम्मानजनक व्यवहार

मानसिक रोग में पुलिस की भूमिका पर कार्यक्रम
गुरुग्राम । समाज में सभी को मानसिक रुप से पीडि़तों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, तभी वे संकट की स्थिति में दूसरेां की मदद ले सकतें है। वर्तमान में मानसिक रुप से पीडि़त समाज व आमजन से कटा हुआ सा अपने आपको महसूस करता है, इसलिए जब उन्हे पुलिस की जरुरत हेाती है तो वे इनकी मदद ले पाने में असमर्थ हेाते है। यह जानकारी संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) की ट्रस्टी रीता सेठ ने पुलिस कमीश्नरेट सभागार में मासिक अपराध समीक्षा के दौरान मानसिक रोग में पुलिस की भूमिका पर आयेाजित कार्यक्रम में दी।
उन्होने बताया कि पूरे गुरुग्राम इलाके में करीब 50 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगी है, जो कि अज्ञानता और व्यवहार के कारण समाज की मुख्य धारा से कटे हुए है। इसलिए हम सभी को मिलकर इनके साथ परिवार जैसा व्यवहार करना है तभी वे मुख्यधारा में लौट सकते है।

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खासतौर पर इसमें पुलिस की अह्म भूमिका हेा सकती है।
संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के राजीव अग्रवाल ने सभी पुलिस अधिकारियों से आव्हान किया कि उनके पास जब भी कोई मानसिक रुप से पीडि़त का मामला आए तो वे सहानुभूतिपूर्वक उस पर विचार करे। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और उन्हे न्याय भी मिलेगा। मानसिक रुप से पीडि़तों के साथ कई तरह के अन्याय होते है, जिन्हे वे स्वंय रेाकने में असमर्थ होतें है, ऐसी स्थिति में उनके पास पुलिस के अलाव दूसरा कोई विकल्प नही है।
रिकवरी सेंटर बना हुआ है वरदान

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गुरुग्राम गांव की चौपाल में एसएचएफ की और से रिकवरी सेंटर खोला है। जो कि पूरी तरह से ग्रामीणों और मानसिक रुप से पीडि़तों को समर्पित है। इस प्रकार की बीमारियों में मरीज के साथ साथ पूरा परिवार संकट की स्थिति में आ जाता है। देशभर में सभी तरह की मानसिक बीमारियों में 3प्रतिशत आबादी में गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रसित है। वंही आत्महत्या का 90 प्रतिशत कारण भी इसे माना गया है। डब्लूएचओ के मुताबिक कुल जनसंख्या में से 10 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी (एमआई) और 3 प्रतिशत गंभीर बीमारी से पीडि़त है। इसमें गुरुग्राम में लगभग 50,000 लोग गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रसित है। इनमें 50 प्रतिशत ऐसे है जो पहचान ही नही किये गए। उन्होने कहा कि हरियाणा सरकार के सहयोग से सेक्टर 31 गुरुग्राम के पाली क्लिनिक में भी रिकवरी सेटर चलाया जाता है जो कि गंभीर मानसिक रोगियों के लिए मददगार साबित हो रहा है।

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इस दौरान मानसिक रुप से पीडि़त युवक जो कि रिकवरी कार्यक्रम से पुनः सामान्य दिनचर्या के साथ आज जीवनयापन कर रहा है, ने अपने जीवन में मानसिक रुप से पीडि़त होने के दौरान जो परेशानियां आई उनके बारे में बताया।
पुलिस अधिकारियेां ने जाने हालात और पूछे सवाल
इस दौरान पुलिस के अधिकारियेंा ने मानसिक रोग पर तकनीकी जानकारी लेने के बाद रिकवरी कार्यक्रम को समझा और सवाल जवाब भी किये। जिनके जवाब संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) की दीपशिखा पाल और ट्रस्टी रीता सेठ ने दिए। पुलिस अधिकारियेां ने यह भी पूछा कि वे किस प्रकार से मानसिक रोगियेां की मदद कर सकतें है। इस पर उन्हे बताया गया कि जब किसी मामले में मानसिक रेागी का नाम आए या फिर उनके साथ किसी प्रकार की घटना घटित हेा तो वे उनकी सकारात्मक रुप से जांच कर मदद करें और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करें।
इस कार्यक्रम में गुरुग्राम के समस्त पुलिसथानाधिकारी, अनुसंधानअधिकारी, डीएसपी तथा एसीपी भी उपस्थित थे।

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