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Thursday, February 25, 2021

श्रीगंगानगर मे हो रहा है हर वर्ग का विकास

देश की आजादी के पश्चात् भाखड़ा एवं राजस्थान नहर ने इस मरूस्थल के भू-भाग में जीवन जल संचार करके इस क्षेत्र को हरे भरे खेतों में बदल दिया। संभवतः देश में गंगागनर जिले को ही यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहां तीन बड़ी परियोजनाओं से सिंचाई होती है और घग्घर नाली बैल्ट भी इस क्षेत्र का उपजाऊ भूभाग है। इसलिए श्रीगंगानगर जिला राजस्थान का अन्न का कटौरा भी कहा जाता है। जिले में गेहूं, जौ, सरसों, चना, कपास, ग्वार तथा गन्ना की फसल भरपूर मात्रा होती है। वर्तमान में किन्नू सहित वाणिज्यिक फसलें अंजीर, जोजोबा, खजूर सहित कई प्रकार की फसलें उगाई जाती है।
राज्य सरकार द्वारा गत दो वर्षों में श्रीगंगानगर जिले में पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्कूल भवन, विद्युत तंत्र के सुदृढीकरण को लेकर अनेकानेक कार्य पूर्ण हुए है तथा अनेक कार्य प्रगतिरत है। इन सभी कार्य के पूर्ण होने से आमजन को राहत मिलेगी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग 

सहयोग योजना :- योजना के अन्तर्गत विभाग द्वारा बीपीएल परिवारों की पुत्रियों व विधवा महिला की अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह के लिए 20 हजार रुपये प्रति पुत्री अनुदान देय है। यदि छात्रा कक्षा 10वीं उत्तीर्ण है, तो 30 हजार रुपये एवं स्नातक उत्तीर्ण है तो 40 हजार रुपये का अनुदान देय होगा। वर्ष 2019-20 में 84.75 लाख रु. खर्च कर 228 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2020-21 में 71.84 लाख रु. खर्च कर 208 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया।
विशेष योग्यजन सुखद जीवन योजना : योजना के अन्तर्गत विशेष योग्यजनों को विवाह के लिए प्रतियुगल 25 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। विशेष योग्यजन युगल में एक का विशेष योग्यजन होना अनिवार्य है। वर्ष 2019-20 में 11 लाख रु. खर्च कर 22 लाभार्थियों को लाभान्वित किया। इसी तरह वर्ष 2020-21 में 50 हजार रु. खर्च कर 1 लाभार्थी को लाभान्वित किया।
मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना :- योजनान्तर्गत विशेष योग्यजनों को स्वरोजगार हेतु अधिकतम 50 हजार रु. ऋण सहकारी बैंक/राष्ट्रीय बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है तथा ऋण राशि का 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम रु. 50 हजार) विभाग द्वारा स्वीकृत कर सम्बन्धित बैंक को भिजवाया जाता है। वर्ष 2019-20 मेंं 20.78 लाख रु. खर्च कर 56 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया तथा वर्ष 2020-21 मेंं 11.87 लाख रु. खर्च कर 33 लाभार्थियों को लाभान्वित किया।
गाडिया लुहारों को भवन निर्माण हेतु सहायता :- गाडिया लुहारों को भूमि आवंटन होने की स्थिति में भवन निर्माण हेतु तीन किस्तों में 70 हजार रुपये दिये जाने का प्रावधान है। वर्ष 2019-20 में 90 हजार रुपये खर्च कर 4 लाभार्थियों को लाभान्वित किया।
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों पर अत्याचार के विरूद्ध सहायता : – अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण नियम 1995 के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्तियों पर स्वर्ण जाति द्वारा अत्याचार किये जाने पर पीडित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है। वर्ष 2019-20 में 201.47 लाख रु. खर्च कर 299 लाभार्थियों को लाभान्वित किया। वर्ष 2020-21 में 426.23 लाख रु. खर्च कर 778 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया।
उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना:- उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति -अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछडा वर्ग, आर्थिक पिछडा वर्ग उत्तर मैट्रिक, मुख्यमंत्री सर्वजन उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना, देवनारायण योजनान्तर्गत उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को संचालित किया जाता है। वर्ष 2019-20 में 1596.17 लाख रु. खर्च कर 8 हजार 242 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2020-21 में 378.77 लाख रु. खर्च कर 1943 लाभार्थियों को लाभान्वित किया।
डॉ सविता बेन अम्बेडकर अन्तर्जातीय विवाह योजनाः– अन्तर्जातीय विवाह योजनान्तर्गत युगल में से एक अनुसूचित जाति तथा दूसरा स्वर्ण हिन्दु होने पर 5 लाख रुपये अनुदान देय है। वर्ष 2019-20 में 170 लाख रु. खर्च कर 34 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2020-21 में 65 लाख रु. खर्च कर 13 लाभार्थियों को लाभान्वित किया।
अनुप्रति योजना :- इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति/विशेष योग्यजनों/बीपीएल चयनित अन्य पिछडा वर्ग एवं सामान्य वर्ग एवं विशेष पिछडा वर्ग के अभ्यार्थियों के मेधावी छात्र-छात्राओं को भारतीय एवं राज्य प्रशासनिक सेवाएं एवं तकनीक शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए अधिकतम 1 एक लाख तक का अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2019-20 में 1.75 लाख रु. खर्च कर 6 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया।
पालनहार योजना:- योजना के तहत अनाथ बच्चे ,मृत्यु दण्ड/आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता के बच्चे ,निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के तीन बच्चे ,पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे, एच.आई.वी-एड्स पीड़ित माता-पिता के बच्चे ,कुष्ठ रोग से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, नाता जाने वाली माता के तीन बच्चे, विशेष योग्यजन माता-पिता के बच्चे ,तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे को सहायता दी जाती है। वर्ष 2019-20 में 895.995 लाख रु. खर्च कर 6138 पालनहार के 11 हजार 234 बच्चों के पालन पोषण के लिए भुगतान किया। इसी तरह वर्ष 2020-21 में 1092.26 लाख रु. खर्च कर 6560 पालनहार के 12 हजार 139 बच्चाें के पालन पोषण के लिए भुगतान किया।
संयुक्त सहायता योजना:- इस योजना के अन्तर्गत विशेष योग्यजनों को स्वावलम्बन हेतु ट्राई साईकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी इत्यादि निःशुल्क दी जाती है। वर्ष 2019-20 में 659 सहायक उपकरण वितरित किये गये। वर्ष 2020-21 में 771 सहायक उपकरण वितरित किये गये।
रसद विभाग
राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में अपील के माध्यम से 24 हजार 58 नये पात्र परिवार एवं 94 हजार 67 यूनिटस चयनित कर लाभान्वित किया जा रहा है। अनुकम्पात्मक नियुक्ति आधार पर 11 उचित मूल्य दुकानों के प्राधिकार पत्र जारी किये गये।
वर्तमान में जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजनान्तर्गत अन्त्योदय अन्न योजना के लाभान्वित परिवारों सहित कुल 3 लाख 6 हजार 124 परिवार व 12 लाख 2 हजार 794 यूनिट चयनित है। अन्त्योदय अन्न योजना में चयनित परिवारों को 35 किलोग्राम, बीपीएल एवं स्टेट बीपीएल परिवारों को 05 किलोग्राम प्रति सदस्य एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से तथा खाद्य सुरक्षा चयनित परिवारों को 05 किलोग्राम प्रति सदस्य दर 2/- रुपये प्रति किलोग्राम के अनुसार खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। कोरोना वायरस कोविड-19 की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित परिवारों को माह अप्रैल-नवम्बर 2020 की अवधि में निःशुल्क राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
पशुपालन विभाग
पशुपालन विभाग द्वारा गत दो वर्षों में पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत 3 लाख 24 हजार 968 कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण 44 हजार 34, वत्स उत्पादन 47 हजार 421, इनाफ टैगिंग 2 लाख 72 हजार 331, एच एस वैक्सीन 4 लाख 3 हजार 607, बी.क्यू वैक्सीन 1 लाख 95 हजार 110, ई.टी वैक्सीन 4 लाख 12 हजार 910, एआरवी वैक्सीन 8 हजार 530, एफएमडी वैक्सीन 10 लाख 12 हजार 883, चिकित्सा कार्य 19 लाख 56 हजार 671, शिविरों का आयोजन 3 हजार 87, नकुल कार्ड 77 हजार 351 तथा गत दो वर्षों में 2 हजार 710 बांझपन निवारण शिविर लगाये गये।
बेरोजगारों को रोजगार:- रोजगार विभाग द्वारा प्रत्येक माह में कैम्पस प्लेसमेंट शिविर एवं त्रैमासिक कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता शिविर  का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों में जिले तथा जिले से बाहर की निजी क्षेत्र की औद्योगिक ईकाइयां, सुरक्षा एजेंसियॉं, बीमा कम्पनियॉं, स्वरोजगार के लिए जिले में स्थापित आरएसएलडीसी के सहयोग से चल रहे संस्थानों के साथ-साथ सरकारी एवं गैर सरकारी विभाग को आमंत्रित किया जाता है। जिसमें उक्त संस्थान विभागीय योजनाओं की जानकारी देते है तथा निजी क्षेत्र के नियोजक आवश्यकतानुसार मौके पर ही आशार्थियों का प्रारम्भिक चयन कर मेले में उपस्थित आशार्थियों को लाभान्वित करते है।
मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना (बेरोजगारी भत्ता योजना):- मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजनान्तर्गत (बेरोजगारी भत्ता योजना) स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगार आशार्थियों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता पुरूष आशार्थियों को 3 हजार रुपये प्रतिमाह , महिला आशार्थियों एवं निःशक्तजन को 3 हजार 500 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है। आवेदक राजस्थान राज्य का मूल निवासी होना चाहिए, पारिवारिक आय 2 लाख से कम होने के साथ पूर्णतया बेरोजगार होना चाहिए, अध्ययनरत्त नहीं होना चाहिए, छात्रवृति से संबधित किसी योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए, परिवार में अधिकतम 2 सदस्योें को ही बेरोजगारी भत्ते का लाभ मिलेगा। यह भत्ता अधिकतम 2 वर्ष के लिये ही दिया जाता है। पुरूष आशार्थी की अधिकतम आयु सीमा 30  वर्ष एवं महिला/अनु.जाति/जनजाति /निःशक्तजन आशार्थी की अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष है। आवेदक निर्धारित प्रारूप मय वांछित जरूरी दस्तावेज के साथ ऑनलाईन फार्म दाखिल कर सकता है। वर्ष 2018-19 में 3253 एवं वर्ष 2019-20 में अब तक 1971 बेरोजगार आशार्थी मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना के अन्तर्गत बेरोजगारी भत्ता का लाभ ले रहे है।
रोजगार कार्यालय द्वारा 2019-20 में 18673 पुरूष तथा 3858 महिला आशार्थियों का पंजीकरण किया गया। विभाग द्वारा नौ रोजगार सहायता शिविर लगाकर 339 आशार्थियों का चयन किया गया। मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना अंतर्गत 2508 पुरूष तथा 2716 महिला के आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये। वर्ष 2019 में लगभग 6 करोड़ 80 लाख तथा वर्ष 2020 में 6 करोड़ 63 लाख रुपये की राशि वितरित की गई।
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
परिवर्तित बजट 2019-20 की बजट घोषणा की अनुपालना में लोक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ आमजन को सरलता, सुगमता एवं पारदर्शी रूप से पहुंचाने के दृष्टिगत राजस्थान जन आधार योजना 2019 प्रारम्भ की गई, जिसके तहत सभी विभागों की योजनाओं के लाभ एवं सेवाओं की प्रदायगी सुनिश्चित की जायेगी।
राज्य के सभी निवासी परिवार पंजीयन करवाने व जनआधार कार्ड प्राप्त करने के पात्र है। प्रत्येक परिवार को एक 10 अंकीय परिवार पहचान संख्या सहित जन आधार कार्ड प्रदान किया जाता है। परिवार द्वारा निर्धारित 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला को परिवार का मुखिया बनाया जायेगा। विभिन्न प्रकार के परिवार कार्डों यथा राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड इत्यादि के स्थान पर एक बहुउद्देशीय जन आधार परिवार कार्ड उपलब्ध करवाया जाता है। जन आधार पंजीयन पोर्टल पर स्वयं अथवा ई-मित्र पर निःशुल्क सुविधा है।
गत दो वर्षों में ब्लॉक अनूपगढ में 25 हजार 483, घडसाना में 29 हजार 153, करणपुर में 22 हजार 716, पदमपुर में 20 हजार 419, रायसिंहनगर में 24 हजार 419, गंगानगर में 52 हजार 569, सूरतगढ में 30 हजार 735, सादुलशहर में 20 हजार 298 तथा विजयनगर में 18 हजार 852 इस प्रकार जिले में कुल 2 लाख 44 हजार 644 लाभार्थियों को जनआधार कार्ड वितरित किये गये।
जिला खेलकूद विभाग
राज्य सरकार ने राजकीय सेवा में खिलाड़ियों के लिये दो प्रतिशत आरक्षण संबंधी नियम राजस्थान विभिन्न सेवा संशोधन नियम 2019 लागू किया है। इससे राजस्थान के मूल निवासी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं पैरा प्रतियोगिता में भाग लेने पर इन नियमों के तहत सरकारी नौकरी हेतु पात्र माना जायेगा। स्कूल गेम्स फेडरेशन व अखिल भारतीय विश्व विद्यालय प्रतियोगिता के पदक विजेता भी इन नियमों के तहत शामिल है। राज्य सरकार ने 56 विभागों में नौकरी देने का प्रावधान किया है। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा 9 अल्पकालीन हॉकी, वालीवाल, जुडो, वुशु, कबड्डी, रोल बॉल, एथलेटिक्स सहित प्रशिक्षक लगाये है।
सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रेक
युवा मामले एव खेल विभाग व खेलो इंडिया योजना अंतर्गत जिला खेलकूल प्रशिक्षण केन्द्र पर वर्ष 2019-20 में चार सौ मीटर सिंथेटिक ट्रेक बनवाया गया, जिसकी लागत 7.30 करोड़ रुपये है। श्रीगंगानगर जिले की यह एक मात्र सौगात है, जहां इंटरनेशनल स्तर का ट्रेक है। खिलाड़ियों को निःशुल्क भूमि आवंटन के तहत ओलम्पिक, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल जैसे अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में अपने उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन से देश एवं राज्य का नाम रोशन करने वाले राजस्थान के मूल निवासी 13 खिलाड़ियों को इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 25-25 बीघा कृषि भूमि आवंटित करने का महत्वपूर्ण निर्णय किया गया, जिसमें श्रीगंगानगर के दो एथलीट को भूमि आवंटित की गई है। सरकार ने खेल को बढ़ावा देने के लिये स्पोर्टस कॉम्पलैक्स के लिये भू-रूपांतरण पर चार्ज नहीं लेने का निर्णय किया। किसान अब अपने खेतों में आसानी से स्टेडियम व खेल मैदान बना सकेंगे।
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