बीकानेर : सामाजिक एकरूपता के लिए यह प्रयास अच्छा है: नमित मेहता

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बीकानेर। जो स्वयं मर्यादा ममें रहते है उन्हें अन्य बन्धन की आवश्यकता नहीं होती। समाज सुधार के सम्बन्ध में जैन महासभा के 21 व्यंजन सीमा अभियान से समाज में एकरूपता व्याप्त हुई है। सामाजिक एकरूपता के लिए यह प्रयास अच्छा है। ये उद्गार (Bikaner District collector) जिला कलेक्टर नमित मेहता ने जैन महासभा द्वारा वर्ष 2021 के पंचांग (Jain panchang calendar)का लोकार्पण करते हुए कही। यह लोकार्पण कलेक्टर निवास स्थान पर आयोजित हुआ। जैन महासभा द्वारा वर्षों से नियमित प्रकाशित होने वाले इस पंचांग का लोकार्पण कोरोना के चलते समारोह में आयोजित नहीं करके सम्मानित जैन प्रशासनिक अधिकारी के कर कमलों से सम्पन्न करवाया।

मुख्य अतिथि को जैन महासभा अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि जैन महासभा संगठन, समाज सुधार व विकास के महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, इससे समाज को और बड़ी उम्मीदें हो गई है। जिला कलेक्टर नमित मेहता से कहा कि वैवाहिक आयोजन सादगीपूर्ण होने चाहिए। छाजेड़ ने मेहता से भी इस अभियान में जुड़ने का अनुरोध किया।

ज्ञात रहे कि जैन महासभा का मानना है कि समाजिक मर्यादाएं कोई कानून नहीं बल्कि कानून से बढ़कर है। उन्होंने कहा कि शादी, विवाह, अन्य सामाजिक, पारिवारिक आयोजन मेल मिलाप समाज में प्रेम और सांमजस्य बढ़ाने के अवसर होते है। इन अवसरों का आयोजन बहुत ही शालीनता और मर्यादा से होना चाहिए। जैन महासभा का कहना है आजकल देखा-देखी में अपव्यय की मानसिकता बढ़ रही है जिसको रोकना समाज की जिम्मेदारी है ताकि समाज अपनी पहचान बनाये रखे।

लोकार्पण नमित मेहता जिला कलेक्टर बीकानेर, जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष विजय कोचर, चम्पकमल सुराणा, जयचन्द लाल डागा व वर्तमान अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ व महामंत्री जैन सुरेन्द्र बद्धानि, सहमंत्री जतन संचेती, मूलचंद डागा, सुमित कोचर, सुरेश बच्छावत व मनीष छाजेड़ ने किया। पंचांग के बारे में जानकारी देते हुए जतन संचेती ने कहा कि पंचांग में तिथि, दिनांक, आयोजन, त्यौंहार, सूर्योदय, सूर्यास्त, नवकारसी, पोरसी, दूघडि़या, चौघडि़या, पक्खी, संवत्सरी इत्यादि के साथ ही जैन धर्म के साथ ही अन्य सभी पर्वों व तीर्थकरों के पंचकल्याणक आदि की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि 21 व्यंजन सीमा अभियान की घर-घर जानकारी रहे, इसमें इस पंचांग की विशेष भूमिका है। संचेती कहा कि यह पंचाग सभी जैन परिवारों में निःशुल्क वितरित किया जायेगा।

जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष जयचन्द लाल डागा ने कहा कि समाज में सादगीपूर्ण आयोजनों हेतु जैन समाज के प्रत्येक व्यक्ति को 21 व्यंजन सीमा अभियान के अनुरूप संकल्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन व आडम्बर जहां आध्यात्मिक रूप से उचित नहीं है वहीं व्यवहार रूप से भी इससे समाज में ईर्ष्या व होड़ बढ़ती है, जो उचित नहीं है।

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महासभा के प्रथम अध्यक्ष विजय कोचर ने कहा कि जैन महासभा ने जरूरतमन्द विद्यार्थियों की शिक्षा हेतु उल्लेखनीय सहयोग किया है। कोचर ने कहा कि आडम्बर व प्रदर्शन में अपव्यय करने की अपेक्षा समाज के विकास, सेवा व कल्याण कार्यों में योगदान श्रेयष्कर होता है। चम्पक मल सुराणा ने कहा कि 21 व्यंजन सीमा के साथ ही निमंत्रण पत्रों सजावट, आतिशबाजी आदि अपव्ययों पर भी रोक लगनी चाहिए।

जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि जैन महासभा का मानना है कि सामाजिक सुधार के लिए अपनाये जाने वाले इन तरीकों से विचार भिन्न हो सकते है परन्तु प्रदर्शन, फैशन, दहेज, बड़े भोज की सीमा कहीं न कहीं तो बांधनी होगी। छाजेड़ ने कहा कि संकल्प में शक्ति होती है। सामाजिक सुधार तभी प्रभावी होते है, जब नेतृत्व करने वाले व्यक्ति स्वयं उन्हे व्यवहार में लेते है। छाजेड़ ने इस सम्बन्ध मे जैन महासभा के अध्यक्ष व पदाधिकारियों का साधुवाद व्यक्त किया कि वे स्वयं इस अभियान में शरीक है और तभी यह अभियान आज गर्व का विषय है। छाजेड़ ने कहा कि सुधार भी दान की भांति घर से शुरू होता है, यह स्वीकृत सत्य है और जैन महासभा के पदाधिकारियों ने अपने घरों से इसकी शुरूआत की है। छाजेड़ ने कहा कि जैन महासभा, बीकानेर के अभियान के तहत मुम्बई, सूरत आदि अनेक क्षेत्रों व जैन समाज के अलावा अन्य जाति वर्ग के लोगों ने भी 21 व्यंजन सीमा अभियान के अनुरूप अपने आयोजन किये है।

सभी उपस्थित जनों ने जिला कलेक्टर नमित मेहता का आभार व्यक्त करते हुए जैन पताका पहनाकर उनका अभिनन्दन किया गया।

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