हाइफा आजादी का दिन :अपने पूर्वजेां के कर्मों और विरासत को सरंक्षित करने में युवा अह्म भूमिका निभाएं: सेना कमांडर

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जयपुर। दक्षिणी पश्चिमी कमान के सेना कमांडर लेफिटनेंट जनरल चेरिश मैथसन ने युवाअेां से आव्हान किया कि वे अपने पूर्वजेां के कर्मों और हमारी विरासत को सरंक्षित करने में अपनी अह्म भूमिका निभाएं। उन्होने कहा कि पूरे इजराइल को (HAIFA DAY CELEBRATIONS) इन बहादुरों के बारे में पता है,जबकि अपनी मातृभूमि में बहुत कम जानते है। सेना कमांडर संवाददाताअेां से बातचीत कर रहे थे।

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उन्होने कहा कि राजस्थान से मिट्टी के पुत्रों ने अपने स्वंय के मेजर दलतपसिंह द्वारा रखे गए, एक परेतवाधित कैवेलरी चार्ज में अधिक घातक हथियारेां के साथ सशक्त रुप से बेहतर बल को हराया और आज के दिनों में इजराइल के तुर्की के कब्जे से हाइफा शहर को मुक्त कर दिया। जयपुर छावनी में 61 कैवेलरी पेालो राउंडस में 22 सितंबर को समारोह का समापन होगा। कार्यक्रम में बिंदु घोड़ों की एक घुड़सवार परेड भी हेागी। इस परेड की समीक्षा सेनाध्यक्ष के द्वारा की जायेगी।
सेना कमांडर ने मीडिया को पुरोत्साहित करते हुए कहा कि वे जल्दी में निष्कर्ष निकालने के लिए न जाए। डाउनसाइजिंग और कैडर समीक्षा के बारे में समाचार बनाने के दौर का उदारण देेते हुए उन्होने कहा कि ये मुददे नवजात चर्चा चरण में है और अभी तक कोई निर्णय नही लिया गया है। किसी भी निर्णय को सभी संबधित कारकों के लंबे विचार विमर्श और चर्चा के बाद ही पहुंचाया जाएगा। उन्होने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबधित मुददेां में गलती की कोई जगह नही है। सेना के मानवाधिकार रिकार्ड के बारे में जवाब में देते हुए स्प्ष्ट किया कि सेना मानवाधिकार उल्लंघन से सबंधित मामलों को गंभीर रुप से लेती है और ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाती है। उन्होने कहा कि आधी जानकारी के साथ निष्कर्ध निकालने की प्रवृति राष्ट्रीय हित में नही है।

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इसलिए मनाया जाता है हाइफा की आजादी का जश्न
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इजराइल के शहर हाइफा पर तुर्की ने कब्जा कर लिया था, जिसमें 23 सितंबर 1918 को भारत से जोधपूर मैसूर हैदराबाद लांसर की घुड़सवार सेना ने हाइफा को आजाद करवाया था। तब से लेकर अब तक इजरायल भारतीय सेना के शौर्य के लिए हाइफा की आजादी का दिन सेलिब्रेट करता है। इजराइल सरकार के निमंत्रण पर जयपुर से 61 कैवेलरी एक दल भी कुछ दिन पूर्व रवाना हुआ था।
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हाइफा की लड़ाई में घुड़सवार सेना का नेतृत्व राजस्थान के मेजर ठाकुर दलपत सिंह ने किया था, जो पाली के रहने वाले थे। उनका साथ उप सेनापति कैप्टन अमन सिंह ने निभाया। हाइफा की लड़ाई के यादगार तार जयपुर में स्थित 61 कैवलरी रेजिमेंट जुड़े हैं, जो कि विश्व की एकमात्र कैवलरी रेजिमेंट है।

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