शिक्षण संस्थाअेां को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए शिक्षकों की पहल

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कोलकाता। स्कूलों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए गुरुवार को उत्तर 24 परगना (पश्चिम बंगाल), हबरा के प्रफुलानगर विद्या मंदिर में एक शिक्षकों के लिए एक कार्यशाला का आयेाजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन उत्तरी  24 परगना के स्कूलों के जिला निरीक्षक और संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस कार्यशाला में उत्तरी 24 परगना जिले के हबरा और अशोक नगर-कल्याणगढ़ सहित दो ब्लॉकों में हबरा -1 और हबरा -2 और दो नगर पालिकाओं के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकेंा और शिक्षकों समेत 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

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इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (केाटपा) -2003 पर शिक्षकों को संवेदीकृत कर स्कूलों को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए उन्हें चैंपियन बनाना  था। इसके साथ ही बच्चों द्वारा तम्बाकू की शुरूआत करने को रोकने के लिए तंबाकू मुक्त शैक्षिक संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए स्कूल स्तर पर केाटपा का कार्यान्वयन करना था। इस कार्याशाला में शिक्षकों को बताया गया वे छात्रों और स्कूल कर्मचारियों, माता-पिता और दोस्तों के बीच तम्बाकू के सेवन को राकेंगे और तंबाकू को नहीं कहने के लिए उन्हें प्रेरित करेंगे।

यह उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में, सभी वयस्कों में 2.3 प्रतिशत धूम्रपान करते हैं या धूम्रपान रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। पश्चिम बंगाल में तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण हर साल 1.5 लाख लोग मारे जाते हैं और 438 बच्चे राज्य में रोजाना तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं। यह भारत और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य के लिए बहुत ही खतरनाक है। जो एक खतरनाक तथ्य है।

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प्रतिभागियों को सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (केाटपा) के बारे में बताया गया था। यह अधिनियम सार्वजनिक स्थानों, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन और इसको बढ़ावा देने , नाबालिगों को तम्बाकू पदार्थों की बिक्री, शैक्षणिक संसथानों से 100 गज की दूरी के भीतर  इसकी बिक्री और वैधानिक चेतावनियों के बिना तम्बाकू धूम्रपान को प्रतिबंधित करता है।

मुक्त स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए विचारों और रणनीतियों बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों ने समूह अभ्यास में भाग लिया। भाग लेने वाले शिक्षकों की प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक थी और उन्होंने कहा कि यह तम्बाकू के खतरे को समझने के लिए एक अद्वितीय और अंतर्दृष्टिपूर्ण सत्र था। कार्यशाला ने उन्हें इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने तंबाकू विरोधी प्रतिज्ञा ली।

यह कार्यशाला पश्चिम बंगाल राज्य में तंबाकू मुक्त स्कूल बनाने की दिशा में कार्रवाई करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित करने में भी मदद करेगी।

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कार्यशाला को उत्तरी  24 परगना स्कूलों के जिला निरीक्षक सुवाजीत चट्टोपाध्याय की सक्रिय भागीदारी, समर्थन और समन्वय सराहनीय रहा। राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिक्षक सत्यजीत विश्वास और स्कूल के सब इंस्पेक्टर सुजॉय घोष को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी बनाया गया था।

अशोकनगर के विधायक धीमन रॉय ने कहा, मैं तंबाकू मुक्त विद्यालय बनाने की इस उत्कृष्ट पहल के लिए संबंध हेल्थ फाउंडेशन के प्रति दिल से आभार व्यक्त करता हूं। इस अवसर पर सभी शिक्षकों से आव्हान किया कि वे तम्बाकू से दूर रहने के लिए और विद्यार्थियेां को शिक्षित करने का संकल्प लें और खुद को इसके लिए आदर्श मॉडल बनें।

इस अवसर पर नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के ओन्कोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्वा गर्ग ने कार्यशाला के दौरान तंबाकू पीड़ितों और उनके परिवारों की वास्तविक स्थिति के बारें में जानकारी दी। उन्होंने कैंसर और तंबाकू के उपयोग के चेतावनी संकेतों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, उनके  मरीज जो प्रमुख मुंह के  कैंसर के सर्जरी कराते हैं,  उन्हें शारीरिक, मानसिक और वितीय रूप से बड़ा नुकसान हेाता है। उनका परिवार  को बहुत ही परेशानियों से गुजरना पड़ता है। ऐसे लगभग 50 प्रतिशत लोग एक वर्ष से अधिक नहीं बच पाते। वे सब पश्चाताप करते हैं कि उन्होंने तम्बाकू का सेवन क्यों किया।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता शिबूप्रसाद मुखर्जी ने कहा, हम, मैं और नंदिता रॉय ने जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमेशा महसूस किया है कि हमारे काम में हमेशा एक संदेश होना चाहिए जो वास्तव में बेहतर रूप से मानव जीवन को प्रभावित करे। चूंकि फिल्में बहुत से लोगों के  दिलों को छूती हैं, हमने अपनी आगामी फिल्म कंथो को तंबाकू के उपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने के माध्यम रूप में उपयोग करने की भी कोशिश की है। हम तंबाकू मुक्त स्कूल बनाने और विद्यार्थियेंा, शिक्षकों, कर्मचारियों के बीच तंबाकू के सेवन के खिलाफ माता-पिता को प्रेरित करने और उन्हें संवेदनशील बनाने के लिए स्कूलों में तंबाकू विरोधी गतिविधियों को शुरू करने के लिए पश्चिम बंगाल के स्कूली शिक्षा विभाग से अनुरोध करते हैं।

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