उष्ट्र स्वास्थ्य-उत्पादन पर शिक्षण एवं शोध के लिये राजुवास और एन.आर.सी.सी. के मध्य हुआ करार

बीकानेर। वेटरनरी विष्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के मध्य उष्ट्र स्वास्थ्य, उत्पादन पर शिक्षण और शोध कार्यों के लिए पूर्व में किए गए तीन साल के आपसी करार (एम.ओ.यू.) की अवधि को बढ़ाने के सहमति पत्र पर शनिवार को हस्ताक्षर किये गए। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. एन.वी. पाटिल ने आपसी करार पर हसताक्षर कर दस्तावेज एक दूसरे के सुपुर्द किए। इस अवसर पर कुलपति प्रो. छीपा ने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच एम.ओ.यू. से अश्व चिकित्सा उत्पादन एवं प्रबंधन के साथ-साथ अनुसंधान कार्यों को गति मिलेगी। इससे संकाय सदस्य, वैज्ञानिक और छात्रों सहित उष्ट्र पालकों को लाभ मिलेगा। किसानोंपयोगी शिक्षा और अनुसंधान हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के निदेशक प्रो. एन.वी. पाटिल ने कहा कि राजुवास के साथ मिलकर कार्य करना हमारे लिए गौरव की बात है। गत तीन वर्षों से चले आ रहे करार से पशु उत्पादन और अनुसंधान कार्यों के साथ ही पशुधन संपदा के कल्याणकारी कार्यों को नए आयाम मिले हैं। इससे समग्र समाज लाभान्वित हो रहा है। करार की अवधि बढ़ाने के फैसलों के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने बताया कि गत 3 वर्षों के करार के तहत उल्लेखनीय कार्य और उपलब्धियां हासिल हुई हैं। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के वैज्ञानिकों के नाम सम्बन्धित विषयों की वैज्ञानिक सूची में संकाय सदस्य एवं सलाहकार के रूप मे शामिल किये जा सकेंगे। दोनों संस्थानों पर उपलब्ध अनुसंधान सुविधाओं का द्विपक्षीय आधार पर उपयोग जारी रहेगा। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के द्वारा ऊंटो के अनुसंधान में प्रदान की गई मदद केे शोध प्रकाषन व अनुसंधान के पेटेंट करवाने में संयुक्त रूप से साझा किया जायेगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय के पी.एम.ई. निदेशक प्रो. आर.के. सिंह, प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूडि़या, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एस.सी. गोस्वामी, एन.आर.सी.सी. के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र सिंह और डॉ. शिरीष नारनावरे भी इस अवसर पर मौजूद थे।

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