आत्मा परियोजना : वेटरनरी विश्वविद्यालय में पशुपालकों ने सीखी “पशुपोषण एवं हरा चारा प्रबंधन“ की तकनीकें

11 rajh rajedner 3बीकानेर। वेटरनरी विश्वविद्यालय और उपनिदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक “आत्मा“ के संयुक्त तत्वावधान में लूणकरनसर के 30 पशुपालकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हो गया। राजुवास के पशुधन चारा संसाधन प्रबंधन एवं तकनीक केन्द्र में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने ’पशु पोषण एवं हरा चारा प्रबंधन’ विषय पर पशुपालकों को सघन प्रशिक्षण दिया गया। राजुवास के वित्त नियंत्रक अरविन्द बिश्नोई ने पशुपालकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण में उन्नत पशु पोषण के उपायों को लागू करके पशुधन से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पशुपालकों को राजुवास से तकनीकी परामर्श सेवाओं का भी पूरा उपयोग करना चाहिए। प्रशिक्षण समन्वयक और प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूडि़या ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषक और पशुपालकों के लिए इस वर्ष कई प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। ये प्रशिक्षण राजुवास के वी.यू.टी.आर.सी. केन्द्रों के साथ-साथ गांवों में भी आयोजित किये जाते है। उन्होंने पशुपालकों का आह्वान किया कि वे वेटरनरी विश्वविद्यालय के उपयोगी प्रकाशनों को वेबसाइट पर देखकर तथा टोल फ्री हैल्पलाइन और वाईस मैसेज सर्विस का लाभ उठाकर भी उन्नत पशुपालन के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रो. धूडि़या ने बताया कि प्रशिक्षण के अंत में पशुपालन प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में विजेता रहे पशुपालक सुभाष बिश्नोई, कैलाश और हनुमान सिंह को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रो. बसन्त बैस, डॉ. दिनेश जैन, डॉ. राजेश नेहरा, डॉ. दीपिका धूडि़या, दिनेश आचार्य, महेन्द्र सिंह मनोहर ने विषय विशेषज्ञ के रूप में व्याख्यान प्रस्तुत किए। पशुपालकों ने वेटरनरी विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाईयों का भ्रमण कर उन्नत पशुपोषण और हरा चारा उत्पादन के प्रायोगिक कार्यों को भी देखा।

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