बचपन की रक्षा करें, बच्चों के हितों को सर्वोपरि मानें – अध्यक्ष, राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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जयपुर। राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती मनन चतुर्वेदी ने कहा है कि बच्चों का संरक्षण और उनके बचपन को सुरक्षित रखते हुए सर्वांगीण विकास से जुड़ी समस्त गतिविधियों और बाल कल्याण व विकास योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ पहुंचाना हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए। श्रीमती चतुर्वेदी ने राजसमन्द जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बाल अधिकार संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों व कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। श्रीमती चतुर्वेदी ने बाल संरक्षण आयोग के निर्देशों के अनुरूप ग्राम्यांचलों में बाल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों के ठोस क्रियान्वयन, सभी संबंधितों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन को मूर्त रूप देने, बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के  लिए खेलकूद और शारीरिक व्यायाम की अनिर्वायता सुनिश्चित करने आदि के निर्देश दिए।
उन्होंने राजसमन्द जिले में बाल संरक्षण गतिविधियों से संबंधित शिकायतों की एक प्रति जिला प्रशासन को भी प्रस्तुत करने के निर्देश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को देते हुए कहा कि इससे इनकी बेहतर और समयबद्ध मोनिटरिंग अच्छी तरह हो सकेगी। आयोग अध्यक्षा ने राजसमंद जिले मेंं बाल श्रम और भिक्षावृत्ति उन्मूलन तथा बाल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों के लिए बनी टॉस्क फोर्स की रेस्क्यू गतिविधियों की समीक्षा की और कहा कि टास्क फोर्स की जिलास्तर पर निर्धारित निर्देशों व नियमों के अनुसार नियमित बैठक होनी चाहिए। अध्यक्षा ने टॉस्क फोर्स से संबंधित कार्यों और गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि टॉस्क फोर्स को जिले में और अधिक प्रभावी स्वरूप दिया जाना चाहिए।
श्रीमती चतुर्वेदी ने जिले में कुपोषित बच्चों खासकर कुंभलगढ़ क्षेत्र में कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिए जाने पर जोर दिया और कहा कि इस बारे में अभिभावकों एवं क्षेत्रवासियों में जागरुकता संचार जरूरी है। 
उन्होंने महिलाओं के पोषण, उनके कल्याण से सम्बन्धित योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार, कुंभलगढ़ क्षेत्र में कुओं की मुंडेर बनवाने, कुपोषण व संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए कुंभलगढ़ में दवाइयों की उपलब्धता के लिए केंद्र स्थापित करने, विश्राम आवास स्थापित करने के निर्देश बाल कल्याण समिति को दिए।
उन्होंने राजसमंद जिला प्रशासन से कहा कि कुंभलगढ़ में भवन अथवा स्थान मुहैया कराने की पहल करे तो वहां बाल कल्याण की गतिविधियों का सूत्रपात किया जा सकता है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने इस पर आश्वासन दिया। उन्होंने जिले के कुंभलगढ़ क्षेत्र में बाल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए सेंटर खोलने की आवश्यकता जताई और कहा कि इसमें प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जन की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
श्रीमती चतुर्वेदी  ने कुपोषित बच्चों के लिए राजसमन्द में ‘पुख्ता कदम’ के नाम से सार्थक अभियान चलाने के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कहा कि यह राजस्थान भर में अपनी तरह का अभिनव नवाचार सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इसमें ऎसा काम होना चाहिए कि इसका सभी क्षेत्रों में अनुकरण हो। उन्होंने एचआईवी पीड़ितों की जानकारी संग्रहित कर उनके लिए आवश्यक प्रबन्ध करने के साथ ही इस विषय के बारे में विस्तृत सर्वे कराने व रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
श्रीमती मनन ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों व निर्देशों की अनुपालना रिपोर्ट 5 दिन में आयोग कार्यालय में भिजवाएं।  अध्यक्षा ने कहा कि उन लोगों को भी बेनकाब करें जो झूठे मामले दर्ज कराते हैं। ऎसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए। 
भिक्षावृत्ति को समाज और देश के लिए कलंक बताते हुए आयोग अध्यक्षा ने कहा कि ऎसे मामलों मेंं सख्ती बरतें और उन सभी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाएं जो बच्चों से भिक्षावृत्ति करवाते हैं। उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारी से कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए हर माह टास्क फोर्स की बैठक करें। उन्होंने श्रम अधिकारी को पाबंद किया कि वे राजसमन्द में बाल श्रम से संबंधित कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट लेकर आयोग के जयपुर कार्यालय में उपस्थित हों। 
बैठक में सामाजिक न्याय  एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक मान्धातासिंह, राजसमन्द बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष भावना पालीवाल एवं सदस्य, बाल संरक्षण एवं कल्याण से संबंधित संस्थाओं, पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों आदि ने  अपने विचार रखे।
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