राजस्थान में दस साल में 48 हजार से ज्यादा ने की खुदकुशी

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-सुसाइड में विश्वभर में नंबर वन भारत 
-महिलाओं के बजाय पुरुष कर रहे हैं अधिक आत्महत्या
जयपुर। प्रत्येक आत्महत्या एक दुखद त्रासदी है। आत्महत्या शब्द सुनते ही हमारी आंखों के सामने एक अप्राकृतिक मृत्यु की तस्वीर उभर आती है। प्रत्येक आंकड़ों से उठती आवाज के बीच हर व्यक्ति की अपनी एक कहानी है, स्वयं की जान लेने के अनेक कारण हैं। एक जीवन जो किसी गर्भ में नौ माह तक पलता है और फिर इस संसार में अपनी सुगंध बिखेरता है उसे कैसे कोई निराशा के भंवर में और एक अज्ञात सुख की खोज में समाप्त कर लेता है। हर खुदकुशी हमारे मन मस्तिष्क में ऐसे ही कुछ अनसुलझे और अन्दर तक झकझोर देने वाले प्रश्न छोड़ जाती है।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जारी की गयी नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2018 के अनुसार देश में वर्ष 2000 से 2015 के बीच आत्महत्या के मामलों में 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है, जिसमें सबसे ज्यादा आत्महत्या 30-45 आयु वर्ग वाले लोगों व 18-30 वर्ष के युवाओं ने की है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में 30-45 आयु वर्ग के 44593 लोगों व 18-30 वर्ष के 43852 युवाओं ने आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, जो की वर्ष 2015 में होने वाली कुल आत्महत्याओं का 33 फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं में से 66 फीसदी आत्महत्या 18-45 आयु वर्ग के व्यक्ति कर रहे है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के बजाय पुरुष अधिक आत्महत्या कर रहे हैं। जहां देश में वर्ष 2000 में 66032 पुरुषों व 42561 महिलाओं ने आत्महत्या की वहीं वर्ष 2015 में 91528 पुरुषों व 42088 महिलाओं ने आत्महत्या की। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में सबसे अधिक तनावग्रस्त लोग रहते हैं। आत्महत्याओं की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सह-प्रायोजक में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन द्वारा हर वर्ष 10 सितम्बर को ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2018 के विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम ‘वर्किंग टुगेदर टू प्रिवेंट सुसाइड’ रखी गयी है।
दस साल में 14 लाख ने की आत्महत्या
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘एडीएसआई’ रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि भारत में वर्ष 2005 से 2015 के बीच 14 लाख से अधिक लोगों ने सुसाइड की है। जहां वर्ष 2005 में 113914 लोगों ने आत्महत्या की वहीं वर्ष 2015 में ये आंकड़ा बढक़र 133623 हो गया यानी कि 2005 से 2015 के बीच देश में आत्महत्याओं के मामलों में 17.3 फीसदी की वृद्धि हुई है जो की दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्रों में सबसे अधिक है। इस मामले में राजस्थान भी इससे से अछूता नहीं रहा है, बीते दस वर्षों में यानी वर्ष 2007 से 2017 के बीच प्रदेश में कुल 48969 लोगों ने खुदकुशी की है। इनमें से 34249 पुरुष, 14719 महिलाओं व एक ट्रांसजेंडर ने आत्महत्या की है।
सुसाइड के पीछे ये हैं प्रमुख कारण
एक रिपोर्ट के मुताबिक सुसाइड के पीछे पारिवारिक समस्याएं/झगड़े, लम्बी बीमारियों से होने वाली शारीरिक, मानसिक व आर्थिक परेशानियां, डिप्रेशन, कर्जा, दिवालियापन, वैवाहिक रिश्तों में अनबन व बेरोजगारी आत्महत्या के प्रमुख कारण बनकर उभर रहे हैं। नि:संदेह ये आंकड़ें व हालात सरकार और समाज दोनों को चेताने वाले हैं। आत्महत्या करने वाले नब्बे फीसदी लोग मानसिक बीमारियों से पीडि़त होते हैं।
ऐसा करने से आत्महत्या को रोकने में मिलेगी मदद 
मई-2018 से देशभर में लागू हुए ‘मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम-2017’ की धारा 115 के अनुसार देश में आईपीसी (1860 का 45) की धारा 309 के तहत आत्महत्या की कोशिश करने वाला तब तक अपराधी नहीं होगा जब तक ये साबित ना हो जाये कि आत्महत्या की कोशिश के वक्त व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ था। एक्ट में सुसाइड को डीक्रिमिनलाईज किया गया है। जानकारों के मुताबिक खुदकुशी की कोशिश करने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्यवाही करने की बजाय उसके मानसिक समस्या के निदान व उपचार पर ध्यान देने की अधिक आवश्यकता है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति-2014’ के अनुसार जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ‘क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर’ व ‘हेल्पलाइन’ सुविधा भी चालू करनी चाहिए जिससे प्रदेश के लोगों को विशेषज्ञ द्वारा उचित परामर्श और उपचार मिल सके और समय रहते उनकी जान बचायी जा सके।
सम्मिलित प्रयासों से कम होंगी आत्महत्याएं 
आत्महत्या एक जनस्वास्थ्य, सामाजिक व आर्थिक चुनौती बन चुकी है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार और सामाजिक संस्थाओं को साथ मिलकर समाज में सौहार्दपूर्ण सामाजिक माहौल और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता स्थापित करने के लिए काम करने की आवश्यकता है तभी सभी के सम्मिलित प्रयासों से आत्महत्याओं को कम किया जा सकेगा।-भूपेश दीक्षित, अध्यक्ष, आरोग्या सिद्धि फाउंडेशन
राजस्थान में वर्षवार आत्महत्या के आंकड़े 
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वर्ष         पुरुष        महिला     ट्रांसजेंडर     कुल  आंकड़े  
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2007     3151       1279        0            4430
2008     3602       1564        0            5166
2009     3511       1554        0            5065
2010     3365       1555        0            4920
2011     3016       1332        0            4348
2012     3227       1594        0            4821
2013     3377       1483        0            4860
2014     3235       1224        0            4459
2015     2537         920        0            3457
2016    2587        1090        1            3678
2017    2641        1124        0            3765
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कुल     34249         14719          1          48969
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