बालिका वधु ने गौने से पहले घर छोडा था, अब सारथी की मदद से बाल विवाह निरस्त

पारिवारिक न्यायालय ने सुशीला के बाल विवाह को किया निरस्त, सारथी ट्रस्ट ने फेसबुक की मदद से कई सबूत जुटाकर कोर्ट में पेश किए थे  

जोधपुर। बाल विवाह के बंधन को नकार कर गौने से पहले आधी रात को घर छोडकर निकलने वाली बाडमेर जिले की बालिका वधु सुशीला ने आखिरकार बाल विवाह से मुक्ति की जंग जीत ली। राजकीय बालिका गृह में संरक्षित सुशीला ने सारथी ट्रस्ट की मदद से पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 में बाल विवाह निरस्त के लिए गुहार लगाई थी।

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जिस पर पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 की न्यायाधीष रेखा भार्गव ने सुशीला के बाल विवाह निरस्त का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। बालिका वधु के बाल विवाह निरस्त में फेसबुक भी काफी मददगार साबित हुई। सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी डाॅ.कृति भारती ने बाल विवाह के संबंध में कई सबूत फेसबुक की मदद से जुटाकर न्यायालय में पेष किए थे।
बाडमेर जिले के पचपदरा तहसील में भांडियावास गांव निवासी सुशीला का वर्ष 2010 में करीब 12 साल की उम्र में दादी के मौसर पर जोधपुर जिले के बिसलपुर गांव निवासी नरेष के साथ बाल विवाह कर दिया गया था। वहीं गत वर्ष उसकी पढाई छुडवाकर गौने की तैयारियां की जा रही थी। सुशीला ने परिजनों को बाल विवाह को नकार कर ससुराल नहीं भेजने की मिन्नतें की थी।
सारथी ने बालिका गृह पहुंचाया
परिजनों के ससुराल भेजने की जिद पर अडे रहने पर सुशीला ने 27 अप्रेल 2016 को देर रात में खुद का घर छोड़ दिया। इस दौरान सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डाॅ.कृति भारती ने देर रात बाड़मेर हाइवे से सुशीला का रेस्क्यू कर बाड़मेर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेष कर कस्टडी ली। वहीं बाद में जोधपुर बाल कल्याण समिति को सुपुर्द कर बालिका गृह में संरक्षित करवाया। करीब सवा साल से सुशीला बालिका गृह में ही संरक्षित है।
निरस्त की गुहार, लड़का मुकरा
सुषीला ने डाॅ.कृति भारती के साथ पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 में करीब 7 वर्ष पूर्व हुए खुद के बाल विवाह निरस्त के लिए गुहार लगाई। न्यायालय की प्रक्रिया के दौरान सुशीला के तथाकथित पति नरेष ने बाल विवाह होने से ही इंकार कर केवल सगाई के लिए बातचीत होना बता दिया।
फेसबुक से जुटाए सबूत
जिस पर सुशीला के तथाकथित पति नरेष की दो फेसबुक आईडी की मदद से डाॅ.कृति भारती ने बाल विवाह के संबंध में कई तथ्य जुटाए। इन तथ्यों के आधार पर कई दस्तावेजी सबूत जुटाए गए। वहीं गवाह भी पेष कर सुशीला के बाल विवाह को सिद्ध किया। सुशीला की ओर से डाॅ.कृति भारती ने पैरवी कर न्यायालय को सायरा के आयु संबंधी प्रमाणिक दस्तावेजों से भी अवगत करवाया।
बाल विवाह निरस्त का आदेष
जिसके बाद जोधपुर पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 की न्यायाधीष रेखा भार्गव ने बाल विवाह के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुशीला के 7 वर्ष पहले वर्ष 2010 में करीब 12 वर्ष की उम्र में हुए बाल विवाह को निरस्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
सारथी ट्रस्ट निरस्त में सिरमौर

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गौरतलब है कि बाल विवाह निरस्त की अनूठी मुहिम में जुटे सारथी ट्रस्ट की डाॅ.कृति भारती ने अब तक 33 जोड़ों के बाल विवाह निरस्त करवाए हैं। देष का पहला बाल विवाह निरस्त और 2015 में तीन दिन में दो बाल विवाह निरस्त करवाने पर डाॅ.कृति भारती का नाम वल्र्ड रिकाॅड्र्स इंडिया और लिम्का बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड सहित कई रिकाॅर्ड्स में दर्ज है। सीबीएसई ने भी कक्षा 11 के पाठ्यक्रम में सारथी की मुहिम को शामिल किया था। डाॅ.कृति भारती को राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
इनका कहना है —
अब पुलिस अधिकारी बनूंगी
कृति दीदी की मदद से मेरा बाल विवाह निरस्त हो गया है। अब मैं अपने सपने पूरे करूंगी। मैं पुलिस अधिकारी बनकर भविष्य संवारना चाहती हूं।
– सुशीला, बालिका वधु। 
समाज को कडा संदेष
पारिवारिक न्यायालय ने बाल विवाह के खिलाफ समाज को कडा संदेष दिया है। सुशीला की पढ़ाई वापस निरन्तर करवा दी गई है, वहीं बेहतर पुनर्वास के लिए प्रयास भी कर रहे हैं।
– डाॅ.कृति भारती, पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, मैनेजिंग ट्रस्टी, सारथी ट्रस्ट, जोधपुर।

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