उत्तरी भारत का प्रसिद्ध मंदिर शक्ति पीठ व धार्मिक पर्यटन स्थल-वैष्णोधाम

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@विकास हर्ष
बीकानेर। जयपुर रोड पर स्थित वैष्णोधाम मुख्यधाम वैष्णोदेवीमाता मंदिर की आंशिक प्रतिकृति है। वैष्णोधाम मंदिर शक्ति पीठ व धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में निरन्तर प्रतिष्ठा के पैमाने को बढ़ा रहा है। नवरात्रा के दिनों में श्रद्धालुओं की सैलाब दर्शन के लिए उमड़ रहा है। मंदिर में नवरात्रा के दौरान विशेष देवी, कन्या पूजन और भक्ति संगीत पूजन सहित विशिष्ट आयोजन में भी बड़ी संख्या में भागीदारी रहती है।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुरेश खिवाणी ने बताया कि कमला कॉलोनी का भगवती मंडल 1976 से ही मां वैष्णोदेवी के प्रति आस्था व लोगों में भावना जगाने के लिए मां की चौकी व जागरण का आयोजन कर रहा है। भगवती मंडल की ओर से देवी मां के भक्त व सुप्रसिद्ध गायक नरेन्द्र चंचल 23 अक्टूबर 1983 जागरण करवाया गया। जागरण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बीकानेर में वैष्णोमाता के मंदिर की मंशा रखी।  वर्षों के बाद आस्था फलीभूत हुई और देवी का यह भव्य धाम साकार ले सका। इस मंदिर के निर्माण में जिला प्रशासन, बीकानेर के जन प्रतिनिधियों का भी अनुकरणीय सहयोग रहा है।
खिवाणी ने बताया कि भगवती मंडल ने 1990 में नौ देवियों की बस यात्रा शुरू की। यात्रा में भी श्रद्धालुओं का उत्साह व सहयोग निरन्तर रहा। वर्ष 1990 से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से विनती कर उन्हें नौ देवी मंदिरों के दर्शन की मंशा पूर्ण की। वर्ष 1997 में 22 अक्टूबर को खींवाणी को मां का आशीर्वाद व प्रेरणा मिली कि बीकानेर में ही वैष्णोधाम की स्थापना कर। जिससे जो नौ देवी विशेषकर वैष्णो माता मंदिर में दर्शन नहीं कर सकें वे बीकानेर में ही दर्शन कर सके। प्रेरणा के भव्य मंदिर के लिए बावजूद आर्थिक समस्या खड़ी हो गई। लेकिन मां वैष्णो के प्रति आस्था व विश्वास और उत्तम भावना से कार्य शुरू किया जो एक दिल पूर्ण हो गया।
मंदिर के निर्माण के लिए प्रयास शुरू हो गए। लोगों को जोड़ने उन्हें भक्ति भावना जागृत करने के लिए रतन बिहारी पार्क में 08 अप्रेल 1998 को सुप्रसिद्ध गायक लखबीर सिंह लक्खा के भक्ति संगीत का कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम में मंदिर निर्माण की भावना मूर्त रूप देने के लिए कार्य शुरू किया गया। वर्ष 2000 में वर्तमान मंदिर स्थल के लिए भूमि खरीद कर रजिस्ट्रेशन का कार्य करवाया गया। तत्कालीन उप राष्ट्रपति व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने 9 नवम्बर वर्ष 2000 को मंदिर की नींव रखी तथा तत्कालीन जिला कलक्टर द्वारा अनुमति के जुलाई 2001 बाद मंदिर अग्रिम भाग का शिलान्यास और 17 फरवरी 2002 को मॉ वैष्णोदवी की स्थापना की गई। अगस्त 2002 को विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्पी जनकराज बग्गा ने सिंह द्वार का निर्माण शुरू किया व मंदिर का मॉडल बनाया। मंदिर में 24 फीट ऊंचा सिंहद्वार बनाया गया हैं। इसके एक तरफ 21 फीट की  हनुमानजी व दूसरी तरफ 21 फीट ऊंची भैरव जी की प्रतिमा और  सिंहद्वार से अंदर जाते ही सामने 16 फीट की भगवान गणेशजी की प्रतिमा श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करते ही आस्था जगा देती है।  माता वैष्णोदेवी के एक तरफ श्याम प्रभु रथ पर विराजमान है व एक तरफ भगवान भोले नाथ विराजमान है। थोड़ा सा आगे जाते ही ‘‘अधर शिला’’ (बिना सपोट) जिसमें शिव परिवार स्थापित किये गये है।
उसके बाद बाण गंगा है जो 15 फुट चौड़ी व 120 फुट लम्बी है जिसमें झरने से पानी गिरता है उसके ऊपर पुल बनाया गया है। वैष्णोदेवी के स्वरूप के अनुसार सर्वप्रथम बाणगंगा मंदिर बनाया गया है उसके बाद जहां माता वैष्णों देवी के प्रथम चरण त्रिकुट पर्वत पर पडे, वहां चरण पादुका मंदिर बनाया गया है, उसके ऊपर जाते है आदि कुमारी मंदिर व हनुमान जी का मंदिर है। पास  ही गर्भ गुफा है कहते है इसमें माता वैष्णों देवी कन्या रूप में नौ मास रही थी इसलिये इसे गर्भ गुफा कहा गया है। गर्भ गुफा के ऊपर हाथी मत्था व सांझी छत श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।
सांझी छत पर भगवान शिव की 18 फुट ऊंची प्रतिमा की जट्टा से गंगा गिरते  ही झरने का रूप लेकर बाण गंगा में गिरती दर्शाई है। सांझी छत पास ही भैरू मंदिर है। साझी के छत से उतरते ही वैष्णो गुफा बनाई गई है जो कि 120 फुट लंबी है। वैष्णों गुफा जैसे कटरा (जम्मू-कश्मीर) में है वैसे ही बनाई गई है जिसमें ठंडा पानी है व शेर का पंजा, शेषनाग, शिवलिंग व पांच पांडव के प्रतीक  चिन्ह है। उसके आगे माता वैष्णोदेवी प्रतिमा को और देवी महासरस्वती, महालक्ष्मी व महाकाली पिण्डी रूप में विराजमान है। गुफा के ऊपर 35 फीट ऊंचा पहाड बनाया गया है, जिसमें झरना व तीन मूर्तियां 12 फीट ऊंची महालक्ष्मी, महासरस्वती व महाकाली प्रतिमा स्थापित की गई है। पास में ही धर्मशाला बनाई गई है व प्याऊ बनाई गई है व पार्क बनाएं गये है। मंदिर निर्माण में मंदिर के ट्रस्टी नवनीत गोयल, गौतमलाल रवीवाणी, हीरालाल पारीक, केशव रहेजा का बहुत ज्यादा सहयोग रहा है व अन्य ट्रस्टी सुनील शादी, रविदत्त शर्मा, राकेश भाटिया, राजकुमार खींवाणी, राजेश गुप्ता व सुभाष भोला का भी सहयोग अनुकरणीय सहयोग रहा है। इसके अलावा श्रीमती गीता देवी पारीक, श्रीमती किरण गोयल ने भी घर-घर जाकर 5-5 लाख एकत्रित मंदिर निर्माण में अनुकरणीय सहयोग दिया।  इसके अलावा बीकानेर के आम जन के सहयोग से ही यह शक्तिधाम पर्यटन व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है। इस मंदिर में बीकानेर के आमजन के सहयोग को भूलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आर्थिक, शारीरिक व मनोरूप से वैष्णोमाता के धाम को मूर्त रूप दिया।  (उप निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क बीकानेर)

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