प्रधानमंत्री ने आरंभ किया ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान

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देश के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ वीडियो कांफ्रेस के द्वारा बातचीत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान में राष्ट्र व्यापी भागीदारी को बढ़ावा देने एवं बापू के एक स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए आज ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान आरंभ किया। आज आरंभ ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान का उद्वेश्य स्वच्छता की दिशा में अधिक सार्वजनिक भागीदारी सृजित करना है। इसका आयोजन 02 अक्टूबर, 2018 को स्वच्छ भारत मिशन की चौथी वर्षगांठ की तैयारी के सिलसिले में किया जा रहा है, जो महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समरोहों के आरंभ को भी चिन्हित करेगा। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति से इस अभियान का हिस्सा बनने और एक ‘स्वच्छ भारत‘ के निर्माण के प्रयासों को सुदृढ़ बनाने की अपील की है। उन्होंने पूरे देश के 17 स्थानों के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ वीडियो कांफ्रेस के द्वारा बातचीत की।

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बातचीत आरंभ करते हुए, प्रधानमंत्री ने कुछ प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया। इसमें शामिल था कि किस प्रकार चार वर्षों के भीतर ही भारत के 450 जिले खुले में शौचालय से मुक्त (ओडीएफ) बन गए हैं। इसी प्रकार, 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने इस अवधि के दौरान खुद को ओडीएफ घोषित कर लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शौचालय या कूड़ादान जैसी सुविधाएं प्रदान करना पर्याप्त नहीं है और यह भी कहा कि स्वच्छता एक आदत है जिसे मन में बिठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश भर के लोग अब इस आदत के विकास में भागीदारी कर रहे हैं।

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असम के डिब्रुगढ़ के बच्चों ने प्रधानमंत्री को अपने स्कूल एवं क्षेत्र को स्वच्छ बनाने की दिशा में अपने योगदान के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने नोट किया कि युवा सामाजिक बदलाव के राजदूत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बच्चों ने स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ाया है, वह सराहनीय है। गुजरात के मेहसाणा में दूध एवं कृषि सहकारी संघों के सदस्य स्वच्छता की दिशा में अपनी पहलों के बारे में प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करने के लिए एकत्र हुए।

प्रधानमंत्री ने आरंभ किया ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान

मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया से फिल्म कलाकार अमिताभ बच्चन ने विभिन्न स्वच्छता कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी जिनसे वह जुड़े हुए हैं। विख्यात उद्योगपति रतन टाटा भी इस बातचीत में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि निजी क्षेत्र स्वच्छ भारत के सृजन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मीडिया से जुड़े व्यक्तियों, आईटीबीपी के जवानों ने भी बातचीत में भाग लिया।

छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा एवं तमिलनाडु के सलेम की महिला स्वच्छताग्रहियों ने प्रधानमंत्री को स्वच्छता की दिशा में अपने प्रयासों के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने गंगा को स्वच्छ करने में जुटे स्वयंसेवकों से भी बातचीत की। अजमेर शरीफ दरगाह के भक्तों एवं हरियाणा के रेवाड़ी के रेल कर्मचारियों ने भी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत की। मा अमृतानंदमयी ने बातचीत में कोवलम से हिस्सा लिया।

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संक्षेप में, संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वच्छताग्रहियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि इतिहास में उनकी भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की दिशा में हमारा विश्वास और संकल्प आकाश की बुलंदियों पर है। उन्होंने लोगों से स्वच्छता ही सेवा अभियान के लिए काम करने का आह्वान किया।

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हर कोने से जुड़े आप सभी स्‍वच्‍छाग्रहियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं, आप सबका स्‍वागत करता हूं। आज 15 सितंबर का ये दिन अपने आप में बहुत ऐतिहासिक है। ऐतिहासिक इसलिए क्‍योंकि आज की सुबह एक नया प्रण, एक नया उत्‍साह, एक नया सपना लेकर के आई है। आज आप, मैं सवा सौ करोड़ देशवासी, स्‍वच्‍छता ही सेवा के संकल्‍प को फिर से एक बार दोहराने जा रहे हैं। आज से लेकर 2 अक्‍तूबर यानी पूज्‍य बापू की जंयती तक देश भर में हम सभी नई ऊर्जा के साथ, नए जोश के साथ अपने देश को, अपने भारत को स्‍वच्‍छ बनाने के लिए श्रम दान करेंगे, अपना योगदान देंगे।दीवाली के समय हम देखते हैं घर कितना ही साफ सुथरा क्‍यों न हुआ हो। लेकिन दीवाली आते हुए पूरा परिवार घर के हर कोने की स्‍वच्‍छता में लग जाता है। वैसे ही हमें भी देश के हर कोने में सफाई का ये स्‍वभाव हर महीना, हर वर्ष बनाते रहना होगा। चार वर्ष पहले जो अभियान शुरू हुआ, स्‍वच्‍छता का आंदोलन अब एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव पर आ पहुंचा है। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि राष्‍ट्र का हर तबका, हर संप्रदाय, हर जाति, हर उम्र के मेरे साथी इस महाअभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। गांव हो, गली हो, नुकड्ड़ हो, शहर हो कोई भी इस अभियान अछूता नहीं है।

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2014 में भारत की स्‍वच्‍छता का कवरेज सिर्फ 40 प्रतिशत था। आज आप सबके पुरुषार्थ और संकल्‍प का परिणाम है कि स्‍वच्‍छता का कवरेज 90 प्रतिशत से अधिक हुआ है। किसने सोचा होगा कि पिछले चार वर्षों में हम स्‍वच्‍छता के कवरेज में उतनी प्रगति कर लेंगे जितनी उससे पहले करीब-करीब 60-65 साल में भी नहीं हो पाई। क्‍या कोई ये सोच सकता था कि भारत में चार वर्षों में करीब 9 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो। क्‍या किसी ने ये कल्‍पना की थी कि चार वर्ष में लगभग साढ़े चार लाख गांव खुले में शौच से मुक्‍त हो जाएंगे। क्‍या किसी ने कल्‍पना की थी कि चार वर्षों में 450 से ज्‍यादा जिले खुले में शौच से मुक्‍त हो जाएंगे। क्‍या किसी ने ये कल्‍पना की थी कि चार वर्षों में 20 राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्‍त हो सकते हैं।

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ये भारत भारतवासियों की, आप सब स्‍वच्‍छाग्रहियों की ताकत हैं। इस स्‍तर का बदलाव सिर्फ सरकार कभी नहीं ला सकती। बात चाहे health की हो या wealth की हो, स्‍वच्‍छता लोगों के जीवन में सुधार लाने में बहुत बड़ा योगदान दे रही है। World Health Organization, WHO के एक अनुमान के अनुसार तीन लाख लोगों की जिंदगी बचाने में स्‍वच्‍छता की भूमिका होगी और एक स्‍टडी बताती है कि स्‍वच्‍छता से डायरिया के मामलों में 30 प्रतिशत की कमी आएगी।

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लेकिन भाईयो और बहनों सिर्फ और सिर्फ शौचालय बनाने भर से भारत तो स्‍वच्‍छ हो जाएगा, ऐसा नहीं है। टायलेट की सुविधा देना, कूड़ेदान की सुविधा देना, कूड़े के निस्‍तारण का प्रबंध करना ये सारी व्‍यवस्‍थाएं एक माध्‍यम है। स्‍वच्‍छता एक आदत है जिसको नित्‍य के अनुभव में शामिल करना पड़ता है। ये स्‍वभाव में परिवर्तन का यज्ञ है। जिसमें देश का जन-जन आप सभी अपनी तरह से सक्रिय योगदान दे रहे हैं। मेरा प्रयास है कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन से जुड़े आपके अनुभव सुनूं, आपसे कुछ सीखूं और फिर हम सभी मिलकर के श्रमदान करेंगे। आज हमें हिन्‍दुस्‍तान के अलग कोने-कोने में जाने का अवसर मिलेगा। वहां जो प्रयास हो रहे हैं उसकी जानकारी सीधी मिलने का अवसर मिलेगा।

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मैं आज फिर एक बार देशवासियों से कहना चाहता हूं देश भर के स्‍वच्‍छाग्रहियों के संकल्‍प और समर्पण को हमनें देखा, सुना, जाना, अनुभव किया, कैसा अभूतपूर्व सहयोग है। देश के बड़े-बड़े गणमान्‍य लोगों के करीब-करीब दो घंटे इस प्रकार से इस कार्य में इस प्रकार से सहभागी होना, उनके अनुभव सुनना, हमें अंदाज आता है कि हिन्‍दुस्‍तान किे हर कोने में किस प्रकार से स्‍वच्‍छता के प्रति सवा सौ करोड़  देशवासियों ने इस आंदोलन को पूरी दूनिया के सामने आज प्रस्‍तुत किया है। दुनिया देख रही है।भविष्‍य में इस जन-आंदोलन के बारे में जब भी लिखा जाएगा, पढ़ेगा जाएगा तो आप सभी स्‍वच्‍छाग्रहियों का नाम सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा। जिस प्रकार आजादी के लिए जीवन देने वाले शहीदों को आज आदर और सम्‍मान के साथ देखा जाता है, आपका भी योगदान उसी आदर और सम्‍मान के साथ पूज्‍य बापू के सच्‍चे वारिस के रूप में विश्‍व याद करेगा, ये मेरा विश्‍वास है। क्‍योंकि आप राष्‍ट्र के नव-निर्माण, गरीब, कमजोर का जीवन बचाने और देश की प्रतिष्‍ठा को दुनिया में पुन: स्‍थापित करने वाले एक सेनानी बन गए हैं। सवा सौ करोड़ की शक्ति असीम है, अनंत है, हमारा उत्‍साह उठान पर है। हमारा विश्‍वास चरम पर है और हमारा संकल्‍प सिद्धि के लिए है। आप सभी श्रमदान के लिए तैयार और तत्‍पर है। आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, मैं अभी आपसे विदा लेता हूं क्‍योंकि मुझे भी आपके साथ कहीं न कहीं श्रमदान के इस काम में जुड़ना हैं।

मैं फिर से एक बार आपकी प्रेरणा के लिए आपके पुरुषार्थ के लिए आपका हृदय से अभिनंदन करता हूं। सभी महापुरुषों को प्रणाम करते हुए मेरी बात को विराम देता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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