संघ शिक्षा वर्ग दीक्षांत समारोह: धर्म और भाषा में नहीं बंटा राष्ट्रवाद: पूर्व राष्ट्रपति

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नागपुर (महाराष्ट्र)। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत की पहचान को भेदभाव और नफरत से खतरा है। ये राष्ट्रवाद किसी भाषा, रंग, धर्म, जाति आदि से प्रभावित नहीं होता है और जो हमारी 5000 पुरानी सभ्यता रही है उसको कोई भी विदेशी आक्रमणकारी और शासक खत्म नहीं कर पाया। पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह संघ के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित होने वाला तीसरे वर्ष का वार्षिक प्रशिक्षण है। आरएसएस अपने स्वयंसेवकों के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण शिविर लगाता है।

उन्होने कहा कि असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीय पहचान धूमिल होती है। भारत विविधताओं से भरा देश है। देश के प्रति निष्ठा ही देशभक्ति है। यहां की राष्ट्रवाद की परिभाषा यूरोप से बिल्कुल अलग है और भारत पूरे विश्व में सुख शान्ति चाहता है और यह पूरे विश्व को परिवार मानता है। इस बात को सभी ने माना है कि हिंदू एक उदार धर्म है। ह्वेनसांग और फाह्यान द्वारा भी हिंदू धर्म की बात कही गई है। राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है और भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हुए हैं।

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प्रणब मुखर्जी ने सरसंघचालक मोहन भागवत से कहा कि ज्यादा समय तक बोलने के लिए माफी चाहता हूं।

इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि स्थापना के बाद विभिन्न दिक्कतों के बाद भी संघ आगे बढ़ता गया, अब संघ लोकप्रिय है। जहां जाते हैं, हमें स्नेह मिलता है। यह लोकतांत्रिक विचारों वाला संगठन है। इसका काम लोगों को जोड़ना है। संगठित समाज देश को बदल सकता है और सब विविधिताओं का सम्मान करते हुए सनातन परंपरा को बल देने का काम करना चाहिए। सरकार बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन सब कुछ नहीं कर सकती।

संघ की स्थापना
1911 से प्रयोग करते हुए डॉक्टर हेडगेवार ने 1925 में संघ की स्थापना हुई थी।

कैसे बुलाया और वह कैसे जा रहे हैं ये चर्चा निरर्थक: संघ प्रमुख
-आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा इस कार्यक्रम के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी को हमने सहज रूप से आमंत्रण दिया और उन्होंने हमारा स्नेह पहचानकर सहमति दी। उनको कैसे बुलाया और वह कैसे जा रहे हैं ये चर्चा निरर्थक है। प्रमुख मोहन भागवत ने प्रणब मुखर्जी के न्योते को लेकर कहा कि हमारे लिए कोई पराया नहीं है। प्रमुख व्यक्तियों को बुलाने हमारी परंपरा रही है। विविधता में एकता हमारी पहचान रही है। भारत में जन्मा हर व्यक्ति भारत माता का पुत्र है।

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सियासी जुबानी जंग जारी
आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम में जाने के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के फैसले से पहले ही राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया और सियासी जुबानी जंग जारी रही। उनके यंहा आने पर कई कांग्रेस नेताओं ने उनके फैसले की निंदा की है। इसको लेकर दिग्गज कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम, जयराम रमेश, सीके जाफर शरीफ समेत 30 नेताओं प्रणब मुखर्जी से नागपुर ना जाने की अपील की थी, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने इस पर 7 जून को जवाब देने को कहकर सबको चैंका दिया।

मुखर्जी द्वारा हेडगेवार को श्रद्धांजलि
पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने से जुड़ी यह यात्रा उनके निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी और पूर्व राष्ट्रपति ने अचानक ऐसा करने का निर्णय लिया।

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विजिटर बुक में लिखा
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार के घर की विजिटर बुक में लिखा, आज मैं यहां भारत माता के महान सपूत को श्रद्धांजलि देता हूं।

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