आज शाम 4 बजे राष्ट्रीय स्मृति स्थल में होगा पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार (16 अगस्त) को दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर निधन हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी का पार्थिव शरीर दिल्ली के 6 कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शनार्थ रखा गया है। कल से ही देश की राजनीतिक हस्तियेां का अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर आने का सिलसिला जारी है। दुनियंाभर में लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोग वाजपेयी जी को श्रद्धांजली अर्पित कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के निधन पर 7 दिन का राजकीय शोक घोषित, सभी स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, राजनाथ सिंह, उद्धव ठाकरे समेत कई हस्तियों ने फूल चढ़ाकर श्रद्धांजली दी। भारत सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
आज सुबह 9 बजे वाजपेयी का पार्थिव शरीर बीजेपी मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। आज दोपहर 1 बजे स्मृतिशेष वाजपेयी की अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। नौ सेना, वायु सेना, थल सेना के जवान वाजपेयी जी के पार्थिव शरीर के साथ मौजूद रहेंगे। सेना के जिस वाहन में अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनको निवास से बीजेपी ऑफिस में लेकर जाया जायेगा उसमें अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार के लोगों के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी रहेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का राजनीतिक जीवन
शुक्रवार को प्रार्थना सभा और 21 बंदूकों की सलामी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर का आज शाम 4 बजे यमुना किनारे राजघाट के करीब राष्ट्रीय स्मृति स्थल में दाह संस्कार किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अटल जी अब नहीं रहे, अटल जी के रूप में भारतवर्ष ने अपना अनमोल अटल रत्न खो दिया है। अटल जी का विराट व्यक्तित्व और उनके जाने का दुख दोनों ही शब्दों से पड़े है। वह एक जननायक, प्रखर वक्ता, ओजस्वी कवि, पत्रकार, प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व के धनी थे। उनका निधन संपूर्ण राष्ट्र के लिए क्षति है। मेरे लिए अटल जी का जाना पिता तुल्य संरक्षक का उठने के जैसा है। वे जब भी मिलते थे पिता की तरह खुश होकर गले लगाते थे। मेरे लिए उनका जाना ऐसी कमी है जो कभी भर नहीं पाएगी।

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