राष्ट्रीय जौहर श्रद्धाजंलि समारोह सम्पन्न

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DSC_0918चितौड़गढ। जौहर स्मृति संस्थान व पर्यटन विभाग राजस्थान के सहयोग से जौहर श्रंद्धाजलि समारोह का आयोजन 25 वीं (रजत जयन्ती) महाराणा सांगा स्मृति पारम्परिक ग्रामीण एवं जन जाति खेलकूद प्रतियोगिता के उद्घाटन इन्दिरा गाँधी स्टेडियम में समारोह के मुख्य अतिथि धनसिंह राठौड़ विकास अधिकारी पंचायत समिति चितौड़गढ थे। इस समारोह को रजत जयन्ती के रूप में मनाया जा रहा है। संस्थान के उपाध्यक्ष तख्तसिंह सोलंकी भंवरसिंह खरडीबावड़ी, महेन्द्र कंवर बस्सी, नरपत सिंह भाटी, कानसिंह सुवावा ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। प्रतियोगिता के संयोजक अनिरूद्व सिंह बानीणा थे। महाराणा सांगा स्मृति खेलकूद प्रतियोगिता का समापन समारोह सांय 4 बजे इन्दिरा गाँधी स्टेडियम में स्नेप शुटिंग, तीरंदाजी, रस्सा कस्सी व परम्परागत खेलों में भाग लेने वाले खिलाडि़यो ने श्रेष्ठ प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं अश्वपालकों ने अपने प्रशिक्षित घोड़ो के करतब दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस दौरान कई अश्वों ने अपने अश्व पालक के इशारे पर हैरत अंग्रेज प्रदर्शन कर महाराणा प्रताप के चेतक की स्मृतियों का ताजा कर दिया। इस मौके पर क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने मेवाड़ी और मारवाड़ी साफा बांध प्रतियोगिता का प्रदर्शन किया। वहीं बालिकाओं एवं महिलाओं ने रूमाल झपटा, खो-खो एवं मेहन्दी प्रतियोगिता में साथ स्नेप सुटिंग में भी भाग लिया। प्रतियोगिता के समापन अवसर पर उतरांचल के पूर्व खेल मंत्री नारायणसिंह राणा, जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसरा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजन दुश्यन्त थे। समारोह के अन्त में विजेता, उपविजेता खिलाडि़यों को प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र व नकद पुरूस्कार समारोह के अतिथियों द्वारा प्रदान किया। DSC_0567
जौहर भवन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम व कवि सम्मेलन का आयोजन के अतिथि सी. डी. चारण, उप पंजीयक नगर विकास न्यास, चितौड़गढ, विजय सिंह जी सिरसू नागौर, आर. सी. चन्देल कानपुर उ. प्र., राजऋषि ठा. उम्मेदसिंह धोली के आतिथ्य में प्रारम्भ हुआ। सांस्कृतिक संध्या के संयोजक सोहन सिंह सावा, लालसिंह अमराणा, कानसिंह सुवावा, सुरेन्द्रसिंह गोपालपूरा थे। कवि सम्मेलन के संयोजक नवीन सारथी व हिम्मत सिंह उज्जवल थे। कवि सम्मेलन में सिद्धार्थ देवल उदयपुर, देवकरण देव केकड़ी, गोपाल धुरन्धर नीमच, मुराद मेवाड़ी कपासन, सोहन जी चौधरी गंगरार, डॉ. सी. डी. फव्वारा फतहनगर, राष्ट्रीय कवि अब्दुल जब्बार, अमृतवाणी नन्दकिशोर निर्जर व डॉ. जोगेन्द्रसिंह छोटाखेड़ा ने वीर-वीरागंनाओं को कविता के रूप में श्रंद्धासुमन अर्पित कर कविता पेश की। जिसमें उपस्थित हजारों नर-नारियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्द्धन कर श्रंद्धासुमन अर्पित किये। कुमारी रजनी कणार्वट ने रणथम्बोर के हमीर देव की बेटी देवल दे का आत्मोत्सर्ग की प्रस्तुती शौर्य-गाथा में देकर उपस्थित महानुभावों को भाव विभोर कर दिया। DSC_0829
भुपाल राजपूत छात्रावास से शोभायात्रा पारम्परिक लवाजों के साथ प्रारम्भ हुई। सबसे आगे घोड़े पर नगांर, खाना, उसके बाद हाथी जिस पर रावत चुण्डा के परिवेश में क्षत्रिय विराजमान थे। उसके पीछे सज्जे-धज्जे ऊँट अलबेले घोड़ों पर सज्ज-धज्ज कर बैठे राजपूत वीर थे । आगे बैण्डबाजों पर देश भक्ति और वीरता की धुन बज रही थी। अश्व पालक ढ़ोल की थाप पर अश्वों के करतब व नृत्य दिखाते चल रहे थे। इसके पीछे ग्रामीण अंचल के गैर नृत्य पारम्परिक पोशाक में थाली, मांदल बजाते हुए अपनी ही मस्ती में गैर नृत्य, गवरी नृत्य खेलकर ध्यान आकर्षित कर रहे थे। इसके साथ ही महावीर व्याम शाला के पहलवान हैरत अंग्रेज करतब दिखाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों, अतिथियों सहित हजारों संख्या में देशभर के विभिन्न क्षैत्रों से आए लोग, महिलाए, युवा-युवतियाँ जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभायात्रा में महाराज कुमार विश्वराजसिंह मेवाड़, विघायक चन्द्रभानसिंह आक्या, रावत युग प्रदीप सिंह हमीरगढ़, प्रघान प्रवीण सिंह राठौड़, उपाध्यक्ष तख्तसिंह सोलंकी, भंवरसिंह खरड़ीबावड़ी, महेन्द्र कंवर बस्सी, भगवती झाला, खेमसिंह राणावत, कानसिंह सुवावा, उम्मेदसिंह डाबर, जलगाँव महाराष्ट्र के डॉ. नरसिंह परदेशी, भूपाल नोबल युनिवर्सीटी के वाइस चान्सलर महेन्द्रसिंह आगरिया, प्रबन्ध निदेशक मोहब्बतसिंह राठौड़ सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारीगण, महिलाए भी चल रहे थे। सबसे पीछे टेक्टरों में विराजित एकलिंग नाथ, महाराणी पद्मिनी, जन जौहर की प्रतिमा, महाराणा प्रताप की छवि, त्याग की प्रतिभूति पन्नाधाय चन्दन की झाँकियों सहित कई झाँकियाँ सुशोभित थी। झाँकियों पर लगातार पुष्प वर्षा की जा रही थी। शोभायात्रा कलेक्ट्री चौराया, पन्नाधाय सेतु मार्ग, सुभाष चौक, गोल प्याऊ, सदर बाजार, मिठाई बाजार, पाडनपोल, रामपोल होकर फतेहप्रकाश महल प्रांगण पहुँची। शोभायात्रा की शुरूआत के साथ ही शहर भर में पग-पग पर विभिन्न समाजों, सस्थाओं व आमजन ने स्वागत द्वार लगाकर, बैनर लगाकर, पेयजल-शर्बतपान, अल्पाहार, फल वितरित करना व पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। जिससे काले डामर की सड़केें भी गुलाबी पुष्पों से लाल हो गई। शोभायात्रा के संयोजक नाहरसिंह चितौड़ीखेड़ा, गोपालसिंह पायरी, लक्ष्मणसिंह ऊँचा सहित कई कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व किया। राणा सांगा बाजार में स्थित महाराणा सांगा की प्रतिमा पर महाराज कुमार विश्वराजसिंह व विघायक आक्या द्वारा वीर पूजा की गई। नेतृत्व भवानीशंकर पाण्ड्या व समिति अध्यक्ष रतनलाल डांगी द्वारा किया गया। DSC_0830
शोभायात्रा के पाडनपोल पहुँचते ही वीरपूजा के संयोजक नरेन्द्रसिंह पुठोली, भुपतसिंह पुठोली, भंवरसिंह झाला, गोपालसिंह भाटी के नेतृत्व में अतिथियों व संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा रावत बाघसिंह जी स्मारक पर पूजा अर्चना करते हुए कल्ला जी राठौड़, जयमल जी राठौड़, चुण्डावती के स्मारकों की पूजा अर्चना कर चौला चढ़ाया गया तथा विजय स्तम्भ के पास स्थित जौहर स्थली पर प्रात 8ः15 से ही यज्ञ हवन चलता रहा जिसमें आगन्तुक अतिथियों व संस्थान के पदाधिकारियों ने हवन कर पुर्णाहुति कर वीर-वीरागंनाओं को आहुति दी गई। यज्ञ समिति के संयोजक देवेन्द्र सिंह शेखावत, रूपसिंह शक्तावत, डॉ. सीमा श्रीमाली, गंगासिंह साजियाली के नेतृत्व में किया गया।
तीन दिवसीय मेले में जौहर भवन पर भोजन समिति के संयोजक शक्तिसिंह चौथपुरा, भंवरसिंह चितौड़ी, पुष्पेन्द्र सिंह चौथपुरा, आदित्यवीर सिंह घटियावली, भोजन व्यवस्था दुर्ग के संयोजक भंवरसिंह नेतावल गढ़ पाछली, विजयसिंह मिन्नाणा, कानसिंह ओछड़ी, ईश्वरसिंह चिŸाौड़ीखेड़़ा, प्रचार-प्रसार समिति संयोजक -हरिसिंह ऐराल, विजयसिंह खरड़ीबावड़ी, प्रेमसिंह राणावत, रामसिंह सेमलपूरा, राजेन्द्रसिंह तंवर, महेन्द्रसिंह तंवर, कार्यालय सचिव समर्थ सिंह शेखावत, मंगलसिंह झाड़ौली, गोवन्दि सिंह झाड़ौली, भंवरसिंह खोर, खेलकुद समिति संयोजक अनिरूद्व सिंह बानीणा, चावण्ड सिंह दांतड़ा, वीरेन्द्रसिंह साँखड़ो का खेड़ा, दलपतसिंह तिलोली, योगेन्द्रसिंह राठौड़, शिवपालसिंह झालरा, रवीन्द्रसिंह मुरोली, भूपेन्द्रसिंह डगला का खेड़ा, आवास व्यवस्था संयोजक नाहरसिंह मुरोली, जनक सिंह बस्सी, प्रदीपसिंह नाहरगढ़ सहित विभिन्न महानुभावों ने सफल आयोजन हेतु योगदान दिया।
दोपहर 12ः15 बजे फतेहप्रकाश महल प्रांगण में आयोजित मुख्य श्रंद्धाजलि समारोह प्रारम्भ हुआ। समारोह का प्रारम्भ द्वीप प्रज्जवलित कर तीनों जौहर मंे आत्मोत्सर्ग करने वाली वीरागंनाओं को पुष्पों की पुष्पांजलि धर्मगुरू आदरणीय सन्त श्रीश्री 108 श्री समताराम जी महाराज मंहंत नांद गौशाला तीर्थराज पुष्कर द्वारा व संस्थान के सभी पदाधिकारियों सहित किया गया। उसके बाद प्रतिवर्ष आने वाली महाराष्ट्र औरंगाबाद से नारायणसिंह होलिये द्वारा लाई गई मशाल का प्रज्जवलन धर्मगुरू समताराम जी महाराज द्वारा किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि महामहिम वी. पी. सिंह जी राज्यपाल, पंजाब, समारोह की अध्यक्षता महाराज कुमार विश्वराज सिंह मेवाड़, अतिविशिष्ट अतिथि राजेन्द्रसिंह राठौड़ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्य मंत्री राजस्थान सरकार, विशिष्ट अतिथि अविनाश राय खन्ना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भा.ज.पा., सी. पी. जोशी, सांसद चितौड़गढ, लेफ्टीनेन्ट जनरल नन्दकिशोर सिंह (से.नि.), चन्द्रभान सिंह आक्या, विघायक चितौड़गढ, प्रदीप कुमार सिंह सिंगोली पूर्व विघायक माण्डलगढ़, लीला जाट, जिला प्रमुख चितौड़गढ, भूपाल नोबल्स युनिवर्सीटी के वॉइस चान्सलर महेन्द्रसिंह आगरिया, डण्क्ण् मोहब्बतसिंह रूपाखेड़ी, उतराखण्ड के पूर्व मंत्री नारायणसिंह राणा, बद्रीलाल जाट, डेयरी चैयरमैन, प्रधान प्रवीण सिंह राठौड़, नगर परिषद सभापति सुशील शर्मा सहित सभी अतिथियों को मंचासीन करवाया। संस्थान के अध्यक्ष राजऋषि ठा. उम्मेदसिंह धौली, उपाध्यक्ष तख्तसिंह सोलंकी, महेन्द्र कंवर बस्सी, खेमसिंह राणावत, भगवती देवी झाला, महामंत्री भंवरसिंह खरड़ी बावड़ी, संयुक्त मंत्री कानसिंह सुवावा, कोषाध्यक्ष नरपतसिंह भाटी ने अतिथियों को माला पहनाकर पुष्प गुच्छ, प्रतीक चिन्ह भेंटकर, शॉल ओढ़ाकर, बेंच लगाकर स्वागत सत्कार किया। उसके पश्चात विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों एवं प्रतिष्ठित नागरिकों व आमजन व समारोह में उपस्थित हजारों नर-नारियों ने जौहर प्रतिमा पर पुष्पाजंलि अर्पित कर श्रद्धाजलि दी।
उसके बाद संस्थान के अध्यक्ष राजऋषि उम्मेदसिंह धौली ने स्वागत उद्बोधन देते हुए जौहर में देशभर से पधारे क्षत्रिय, क्षत्राणियांे व आमजन के पहुँचने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अनवरत जारी रखने का आव्हान किया। उन्होनें पर्यटक मंत्री भारत सरकार व सांसद सी. पी. जोशी से जौहर स्थली को तीनों जौहर की स्मृति में उनके स्वाभिमान व गौरव की याद दिलाने के लिये

प्रतिवर्ष यह आयोजन किया जाता है। उन्होने बताया कि सभी बलिदानों में मुख्य रूप से जौहर का बलिदान सर्वश्रेष्ठ है। इनकी याद में जौहर स्थली पर जौहर स्मारक व प्रकाश स्तम्भ बनाने की मांग की। व राजस्थान सरकार से बन्दुकों के नवीनीकरण फीस को पुनः कम करने की मांग की गई। मुख्य अतिथि वी. पी. सिंह बदनोर महामहिम पंजाब ने कहा कि प्रदेश का विशेष रूप से चितौड़गढ का इतिहास गौरवपूर्ण हैं। यहां के दुर्ग केे आगोश में वीरता की गौरवपूर्ण कहानियाँ छिपी है। हमें मेवाड़ के इतिहास से प्रेरणा लेकर देश के विकास में भागीदार बनना चाहिए। उन्होनें वीरागंनाओं को याद करते हुए कहा कि जब जब भी मेवाड़ के इतिहास को याद किया जाता है, देश प्रेम के जब्बे से मस्तक ऊँचा हो जाता है। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ ने कहा कि वीर-वीरागंनाओं की याद में जौहर मेला आयोजित होना गौरव का विषय है। उन्होनंे पद्मिनी के इतिहास के विवाद पर बोलते हुए कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ करना अनुचित है।
समारोह में धर्मगुरू संत समताराम जी महाराज ने अपना आशीर्वचन देते हुए कहा कि जिस प्रकार मर्यादा पुरूषोतम राम के चरित्र को जीवन में उतारने की आवश्यकता है उसी प्रकार मेवाड़ का इतिहास भी प्रेरणा का स्त्रोत है, उन्होनें शिक्षा में संस्कारों का समावेश करने पर बल दिया और मानव मस्तिष्क में दानव मन को नष्ट किया जाना आवश्यक है।
इस दौरान करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्रसिंह कालवी ने महारानी पद्मिनी पर बन रही फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ करना कभी बदार्श्त नहीं किया जायेगा।
स्थानीय सांसद सी. पी. जोशी ने कहा कि मेवाड़ को सभी जगह सम्मान के साथ देखा जाता है कि यहां पर एक नहीं तीन-तीन जौहर हुए है। आने वाले समय में दुर्ग का और विकास किया जायेगा। चितौड़गढ विघायक चन्द्रभान सिंह आक्या ने चितौड़गढ विकास के साथ दुर्ग विकास के लिये कटिबद्व है। मुख्यमंत्री हर वक्त दुर्ग के विकास के लिये तैयार है।
समारोह में प्रदीप कुमार सिंह सिंगोली पूर्व विघायक माण्डलगढ़ ने कहा कि क्षत्रिय समाज ने माटी के लिए अपनी जान दे दी, लेकिन दुख होता है कि फिल्मों में इस समाज को खलनायक के रूप में दिखाया गया। वहीं आजकल इतिहास से छेड़छाड़ भी हो रही है। इस अवसर पर प्रतिभाअेंा को सम्मान भी प्रदान किया गया।

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