तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रधानमंत्री को पत्र

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जयपुर। सिगरेट और तम्बाकू उत्पादों के पैकेटों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर देशभर के 453 कैंसर रोग चिकित्सकेंा और 10 मेडिकल एसोसिएशन ने विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस दिशा में उचित कदम उठाने की अपील की है। जिससे युवा पीढ़ी को इसके खतरनाक प्रभावों से बचाया और स्वस्थ भारत बनाया जा सके।

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कर्नाटक हाईकोर्ट के 15 दिसंबर,2017 के फैसले का विरोध करते वायॅस आॅफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी)से जुड़े कैंसर चिकित्सकेंा और मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है कि पिछले दो साल से प्रभावी इस 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी तम्बाकू और धूम्रपान सेवन को रोकने में काफी प्रभावोत्पादक साबित हुई है। इस चेतावनी की सफलता को ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे 2017 के आंकड़ों में देखा जा सकता है। सर्वे में जानकारी दी गई है कि इस चेतावनी को देखने के बाद तंबाकू और धूम्रपान छोड़ने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ा है। जिसमें सिगरेट पीने वालों में 38 प्रतिशत से 62.1प्रतिशत, बीड़ी पीने वालों में 29.3 से 54 प्रतिशत, एंव चबाने वाले तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वालों में 34ः से 46 प्रतिशत है।

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वायॅस आॅफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी) के स्टेट पेट्रन व सवाई मानसिहं अस्पताल के प्रोफेसर डा.पवन सिंघल ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि रोजदृरोज कैंसर के रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टर के रूप में कर्नाटक हाई कोर्ट के विचार से वे बहुत ही व्यथित हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट ने 85 प्रतशित चेतावनी की आवश्यकता को खारिज करते हुए कहा था कि तम्बाकू सेवन से कैंसर की बीमारी होती है,इसका कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विचार देकर इतने प्रभावी नियम को रद्द करना बहुत ही दुखद है। तम्बाकू एक ऐसा उत्पाद है जो हर साल लाखों महिलाओं को विधवा ,बच्चों को बेसहारा बनाता है और रोगियों की जान लेता है। इस नए साल के अवसर पर इस फैसले से लाखों लोगों को दुख पहुंचेगा और उन्हें वत्तीय रूप से बर्बादी का समाना करना पेड़ेगा।

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कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले पर टाटा मेमारियल हॉस्पीटल के प्रोफेसर डॉक्टर पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि पैकेटों पर छपी चेतावनी इससे होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों के बीच सही जानकारी पेश करती है। हकीकत तो यह है कि हम डॉक्टरों के पास तस्वीर में छपी चेतवानी से भी अधिक बुरी हालत में रोगी आते हैं। टाटा मेमारियल हॉस्पीटल में हम रोज दर्जन भर से अधिक मरीजों को देखा जा सकता है। इनमें अधिकतर मरीजों की 3 से 6 महीने के अंदर मृत्यु हो जाती है। कहने की जरूरत नहीं है कि हर साल 80 से 90 प्रतिशत मुख कैंसर का पता चलता है और इनमें 50 प्रतिशत की मृत्यु इलाज के 12 महीने के भीतर ही मृत्यु हो जाती है।

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उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर के कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला भारत को दुनिया की रैंकिंग में 146 वें स्थान पर धकेल देगा जो पाकिस्तान की रैंकिंग से भी नीचे है। सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि अगर हाईकोर्ट के इस फैसले लागू किया गया तो लाखों अतिरिक्त लेागों की जान चली जाएगी। कैंसर के इलाज करने वाले और सर्जन और दंत चकित्सकों ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रधानमं त्री को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की है। हाईकोर्ट के आदेश में कि तम्बाकू सेवन से कैसर होने का कोई सार्वभौमिक सिद्धांत नहीं है, पर देश भर के डॉक्टरों ने दुःख जताया है। इन डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री केा लिखे पत्र में कहा है कि पिछले दस साल से वे रोज ऐसे मरीजों का इलाज करते आ रहे हैं और उनके अनुभव एवं विचार में इसमें कोई शक नहीं है कि तम्बाकू सेवन से कैंसर और कई अन्य तरह की बीमारियां नहीं होती।

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डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार तम्बाकू सेवन दुनिया का एक मात्र ऐसा मौत का कारण है जिसे रोका जा सकता है। अकेले भारत में 26.7 करोड़ लोग तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते हैं जिनमें एक तिहाई लोगों की मौत हो जाती है। भारत में रोजना 5500 बच्चे तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं और जब तक उन्हें इसके खतरे का पता चलता है तब तक वे इसके आदी हो चुके होते हैं।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और सांसद दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले ने इस संदर्भ में चली आ रही नीति को पलट दिया है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस पर उचित कदम उठाएगी।
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संबंध हेल्थ फाउंडेशन के ट्रस्टी प्रदीप माथुर ने कहा कि तम्बाकू सेवन के कारण पैदा हुई बीमारियों से भारत में हर हाल 10 लाख लोगों की मृत्यु होती है। देश भर में कई तरह की भाषाएं और बोलियां प्रचलित हैं। पैकेटों पर तस्वीरों वाली चेतवानी लोगों के बीच साक्षरता नहीं होने के बाद भी सही संदेश पहुंचाती है। पूरी दुनिया में 85 प्रतिशत ग्राफिक चेतावनी की काफी सराहना हुई है और यह काफी सफल भी रही है। जैसा कि प्रधान मंत्री ने स्वस्थ देश की कामना की है, भारत में 85 प्रतिशत ग्राफिक चेतावनी के नियम आवश्यक रूप से जारी रहना चाहिए।

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