मोह समस्त व्याधियों की जड़ : पंडित मारूतिनंदन

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जयपुर। मोह समस्त व्याधियों की जड़ है। मोह के जाल में फंस मनुष्य जीवन-मृत्यु के भंवरजाल में उलझ कर रह जाता है।
यदि इन्सांन को इन सबसे ऊपर उठकर अपने मोझ की प्राप्ति करनी है तो उसे ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। यह बात पंडित मारूतिनंदन शास्त्री ने हवा सडक़ स्थित श्रीराम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान कही। कथावाचक पंडित मारूतिनंदन शास्त्री ने जड़  भरत के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जड़ भरत मृग के मोह में ऐसे फंसे कि उन्हें तीन जन्म लेने पड़े।
शास्त्री ने कहा कि ईश्वर की भक्ति के लिए किसी आयु, जाति व योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने पांच साल के बालक ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मात्र पांच साल की आयु के ध्रुव ने महज पांच माह की साधना से ही ईश्वर की प्राप्ति कर ली थी। उन्होंने कहा कि ईश्वर अपने भक्त के किस गुण पर रीझ जाए कुछ पता नहीं, इसलिए भगवान की स्तुति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए।
पंडित मारूतिनंदन शास्त्री ने प्रहलाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष का भी संगीतमय ढंग से गुणगान किया। इस दौरान बामन अवतार की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। यह झांकी देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गये। साथ ही राम-जन्म की कथा व कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस कथा के यजमान प्रीति गाडिय़ा, अंकित अग्रवाल, स्नेहा अग्रवाल थी। अंत में पूजा अर्चना व आरती की गई।

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