भारत की कुल जनसंख्या में हर पांचवा व्यक्ति किशोर अवस्था में :जाबैले बरडम

जयपुर। भारत की कुल जनसंख्या में हर पांचवा व्यक्ति किशोर अवस्था में है जिसे सामाजिक बदलाव में किस तरह संवाहक बनाया जाये व विकास में भागीदारी सुनिश्चित की सकती है- विषय पर दो दिवसीय परामर्श कार्यशाला प्रारम्भ हुई।
‘‘किशोरों के सशक्तिकरण’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान यूनिसेफ के प्रमुख इजाबैले बरडम ने कहा कि किशोरों की समस्याओं को सुलझाने के लिए युद्ध स्तर पर ऐसा मंच बनाया जाना चाहिए जिससे नीति निर्धारण के क्षेत्र में राज्य पर दबाव डाल सके। बाल विवाह, ड्रॉप आउट, बाल श्रम, बाल संरक्षण और जल स्वच्छता जैसे विषयों पर किशोरों की आवाज सुनी जानी चाहिए। उसके अनुरूप नीति निर्धारण होना जरूरी है।
अजीत फाउंडेशन व यूनिसेफ और यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर विजयशंकर व्यास ने कहा कि स्वयंसेवी संगठनों, मीडिया अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को इस क्षेत्र में तथ्य आधारित अध्ययन से अंतिम क्षोर तक व्यक्ति की अभिव्यक्ति पर काम करना चाहिए। किशोरों की आवाज को बढ़ाने के लिए जागरूकता होना जरूरी बताया। यूएनएफपीए के राज्य समन्वयक सुनील थॉमस ने कहा कि किशोरों की सम्पूर्ण क्षमता के  उपयोग के लिए पूरी तरह से मदद की जरुरत हैं। उन्होंने कहा की इसके लिए पिछड़े वर्ग व समाज को पीछे धकेले गए वर्गो से आने वाले किशोरों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
थॉमस ने कहा की बाल विवाह से महज लड़कियों के लिए ही नही वरन लडक़ों की उम्र भी कम हो गई हैं। इसके लिए उन्होंने राजस्थान के ट्रायबल एरियाज उदयपुर के बारे में बताया कि क्षेज्ञ विशेष में होने वाले आटा-साटा प्रथा एक बड़ा उदाहरण हैं। उदयपुर के साथ ही कोटा और सवाईमाधोपुर में भी ऐसी व्यापक समस्याएं हैं।
प्रदेश के किशोरों ने बताई समस्याएं
कार्यशाला में अलग-अलग जिलों से 20 से भी अधिक किशोरों ने संरक्षण व अनुभव सम्बंधी विचारों को मंच पर साझा किया। इस दौरान किशोरों ने बाल-विवाह,  शिक्षा में अधुरापन और बिछड़ापन की समस्याओं के बारे में जानकारी दी। किशोरों ने अपने सवाल एक्सपर्ट्स से भी साझा किए, जिसे विशेषज्ञों ने उनकी हर समस्यां को गम्भीरता से सुनकर उनके  समाधान के बारे में राय दी।
केस स्टडी व टिप्पणी से बताया अधुरा सच
कार्यशाला के दौरान पहले दिन प्रथम ट्रस्ट के डॉ. के बी कोठारी, दूसरा दशक के डॉ. शोभिता राजगोपाल और सिद्ध की ड़ॉ. अन्जू ड्ड्डा ने कार्यक्षेत्र के अध्ययन के आधार पर केस स्टड़ी प्रस्तुत की। सत्र में आईआईटी हैदराबाद के प्रो. नन्द किशोर आचार्य, दुसरे दशक के अध्यक्ष राजेन्द्र भानावत, यूनीसेफ के संजय निराला ने विशेष टिप्पणी की। व प्रमुख शिक्षा विद डॉ. शारदा जैन ने अध्यक्षता की।
स्वास्थय पर आयोजित दूसरे सत्र में चर्चा के दौरान डॉ. एस रामानाथन, डॉ. कंचन माथुर, डॉ. ज्योत्सना राजवंशी ने केस स्टडी प्रस्तुत की। विशेष टिप्पणी में डॉ.सुधीर वर्मा, वल्र्ड बैंक  के सलाहाकार  डॉ. आदेश चतुर्वेदी और यूनीसेफ व यूएनएफपीए के प्रतिनिधियों ने भी टिप्पणी प्रस्तुत की। इस कार्यशाला में राज्य के विभिन्न स्वंयसेवी संंगठनों, निती निर्धारक व बुद्धिजिवीयों और मीडियाकर्मियों ने भाग लिया।