बैंकों के बाहर आम आदमी लाइन में, बड़े कारोबारियों को वीआईपी ट्रीटमेंट

-कैश लेन-देन की समयावधि पूरी होने के बाद बदले जा रहे हैं नोट
जयपुर। 500 व 1000 के नोट बंद की घोषणा के बाद नोट बदलवाने व जमा करवाने को लेकर लोगों को हो रही समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा नित नए नियम लागू करने से बैंकों के बाहर भीड़ में निरंतर कमी आ रही है। करंसी एक्सचेंज के लिए बैंक में आने वाले लोगों की अंगुली पर स्याही लगाने के आदेश के बाद गुुरुवार को इसका राजधानी जयपुर में व्यापक असर देखा गया। नोटबंदी के नौंवे दिन जहां अधिकतर बैंकों के बाहर कतारों की लंबाई अन्य दिनों की तुलना में कम रही। वहीं, ज्यादातर एटीएम्स में गुरुवार को भी नकदी नहीं डाले जाने के कारण लोग रुपये निकालने के लिए भटकते रहे। जिन एटीएम्स में रााि डाली गई वह थोड़े ही समय में खत्म हो गई। भारतीय रिजर्व बैंक के बाहर नोट बदलवाने वालों की कतार गुरूवार को भी कम नहीं हुई। सैकड़ों की संख्या में पुरूष-महिलाएं नोट बदलवाने के लिए गेट के दोनों तरफ लाइनों में लगे खड़े हुए थे।
गरीबी की आड़ में मजे लूटने वालों की नींद उड़ी
नोटबंदी ने जहां एक ओर अमीरों की नींद उड़ा दी है, वहीं अब उन गरीबों को भी नींद नहीं आ रही है जो अब तक गरीबी की आड़ में अमीरी के मजे लूट रहे थे। सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए उन्होंने खुद को बीपीएल सूची में दर्ज करवा दिया था, लेकिन अब उनके खातों में 50 हजार से अधिक रुपए आते ही बीपीएल की सूची पर सवाल खड़ा हो जाएगा। बीपीएल सूची में ऐसे कई लोगों के नाम हैं जिनके बहुमंजिला मकान और अन्य सुविधाएं हैं। इन लोगों को कई बार राज्य सरकार की ओर से आग्रह भी किया गया कि स्वेच्छा से अपने नाम एपीएल में दर्ज करवा दें। इसके लिए उपखण्ड अधिकारी कार्यालय में आवेदन करने के साथ उल्लेख करना होता है कि अब आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और उनका नाम हटा दिया जाए लेकिन एक भी आवेदन इस आशय के पिछले सालों में नहीं आया है। ऐसे में जितने लोग बीपीएल में दर्ज थे उससे घट नहीं रहे हैं।
छह दिन में पहुंचे साढ़े 3 करोड़ के नकली नोट
नोटबंदी के बाद एक हजार व पांच सौ रुपए के नकली नोट बैंको में जमा हो रहे हैं। सीकर जिले के बैंकों में पिछले छह दिन में साढ़े तीन करोड़ रुपए के नकली नोट जमा हो गए हैं। हाल यह है कि कई बैंकों में इस प्रकार के नोटों को फड़वाया जा रहा है और कई बैंकों में ऐसे नोटों को वापस लौटाया जा रहा है। नकली नोट चलाने वाले हुजुम में आते हैं। एक ट्रांजेक्शन करने के लिए पांच से सात मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में बैंक कर्मचारी महज आईडी और नोटों की संख्या देखकर नोट एक्सचेंज कर देते हैं।
मेट्रो यात्रियों को खुल्ले रूपयों की सुविधा
जयपुर मेट्रो ने अपने यात्रियों को 24 नवम्बर तक उपलब्धता के आधार पर खुल्ले रूपये लौटाने की विशेष सुविधा प्रदान की है। एक यात्री द्वारा 10 रुपये एवं इससे अधिक किराये के अधिकतम 6 टोकन खरीदने पर, देय राशि 100 रुपये तक का नोट देने पर निर्धारित किराया काटकर बकाया राशि खुल्ले रुपयों/नकदी में लौटायी जायेगी। एक यात्री द्वारा एक नये 500 या 2000 रूपये के नोट से 100 रूपये के कम से कम 1 या 4 स्मार्ट कार्ड खरीदने पर ही शेष अधिकतम 400 या 1600 खुल्ले रूपये लौटाये जायेगें। यह सुविधा मेट्रो टे्रनों में भी उपलब्ध है। एक यात्री द्वारा बन्द हुए एक 500 या 1000 रूपये के नोट से केवल 100 रूपये के कम से कम 2 या 6 स्मार्ट कार्ड खरीदने पर ही शेष अधिकतम 300 या 400 खुल्ले रूपये लौटाये जायेगें। यह सुविधा मेट्रो टे्रनों में भी उपलब्ध है। एक यात्री द्वारा बन्द हुआ एक केवल 500 रूपया का नोट देकर एक स्मार्ट कार्ड में 50 रूपये या 50 रूपये के गुणांक में अधिकतम 500 रूपया तक का ग्राहक सेवा केन्द्र पर टॉपअप किया जायेगा। यदि यह टॉपअप 100 रूपया या इससे अधिक का है तो शेष खुल्ले रूपये लौटाये जायेगें। इस अवधि में किसी भी स्मार्ट कार्ड को लौटाने पर नकद रिफण्ड स्थगित रहेगा।
यूं हो रही ब्लैक से व्हाइट मनी
नोटबंदी के बाद व्यापारी वर्ग ने अपनी मनी को ब्लैक से व्हाइट करने का नया तरीका इजाद किया है। सूत्रों के मुताबिक छोटे व्यापारी जिन बड़े व्यापारियों से उधार में माल लेते थे अब वे उन्हें एडवांस में 500 व 1000 के नोट दे रहे हैं। कई बड़े व्यापारियों ने छोटे व्यापारियों को लाखों रुपए 20 फीसदी कमीशन के साथ-साथ मासिक किस्तों के रूप में पैमेट लेने की शर्त पर रुपए देने शुरू कर दिये हैं।
बड़े कारोबारी ऐसे बदल रहे हैं करंसी
नोटबंदी के बाद बैंकों की कतारों में दिखाई नहीं देने वाले बड़े कारोबारियों ने भी करंसी एक्सचेंज का अपनी सुविधा अनुसार तरीका निकाल लिया है। अपराह्न चार बजे बाद बैंकों में लेन-देन बंद होना केवल दिखावा है। सूत्र बताते हैं बैंक मैनेजर अपने बड़े खाताधारक व्यापारियों को कैश के लेन-देन की अवधि समाप्त होने के बाद एक से अधिक आईडी पर वीआईपी ट्रीटमेंट देकर रुपए दे रहे हैं।
आरबीआई के खिलाफ सहकारी बैंककर्मियों का प्रदर्शन आज
केंद्रीय सहकारी बैंकों और मिनी बैंकों ने रिजर्व बैंक के आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके चलते देश और प्रदेश के सभी सहकारी बैंकों में 25 नवंबर को हड़ताल रहेगी। इसके अलावा 18 नवंबर को केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों में कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। काबिलेगौर है कि रिजर्व बैंक ने केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों और मिनी बैंकों को पांच सौ और एक हजार रुपए के नए पुराने नोट लेने से मना कर दिया है। इसके चलते सहकारी बैंकों में इन दिनो बैंकिंग गतिविधियां ठप हो गई है। सहकारी बैंक ना नोट एक्सचेंज कर पा रहे और ना ही पुराने बड़े नोटों को जमा कर रहे हैं। इसके चलते सहकारी बैंकों के ग्राहकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑल इंडिया कोआपरेटिव बैंक एम्पलॉयज यूनियन के राष्ट्रीय सचिव सूरजभान सिंह आमेरा ने बताया कि पूरे देश में 369 केंद्रीय जिला सहकारी बैंक है। इनकी देश में 13,944 शाखाएं हैं। जबकि मिनी सहकारी बैंकों की संख्या 12,789 है। इनमें देश के दो करोड़ किसानों के खाते हैं। सहकारी बैंकों की जमाएं तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। जबकि इन्होंने ग्राहकों को 2,500 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज बांट रखे हैं। प्रदेश में ही केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों की करीब 450 शाखाएं है। इनमें बैंकिंग पूरी तरह ठप है। जबकि रिजर्व बैंक से इनको बैंक का लाइसेंस मिला हुआ है। इसके बावजूद सहकारी बैंकों को दूसरे बैंकों की तरह बैंकिंग करने रोक दिया गया है। इसके चलते सहकारी बैंकों को ग्राहक आधार घटने की आशंका पैदा हो गई है।