सिलिकोसिस रोगियों की हांफनी रोकने व वजन बढ़ाने में कारगर करौली का ‘खनिकप्राश’

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करौली-धौलपुर के दस गांवों में 50 सिलिकोसिस रोगियों में जीवनीय शक्ति बढ़ाने के लिए फ्री बांटकर किया था परीक्षण

@एस.एस.डागुर

करौली। रोजी-रोटी के लिए खानों की धूल फांकने वाले खनिकों की सिलिकोसिस से हांफती जिंदगी को संवारने में करौली का ‘खनिकप्राश’ कारगर साबित हो रहा है। डांग विकास संस्थान की ओर से दो माह पहले 55 प्रकार की खास जड़ी-बूटियों से तैयार की गई विशेष औषधि का प्रायोगिक परीक्षण करौली-धौलपुर के चिह्नित दस गांवों के 50 श्रमिक रोगियों पर किया गया,जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। ज्यादातर रोगियों की हांफनी रुकने के साथ ही डेढ़ से चार किलो तक वजन और हीमोग्लोबिन भी बढ़ा है।

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गौरतलब है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने व निरंतर स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट के कारण चारपाई पकड़ चुके सिलिकोसिस रोगियों के स्वास्थ्य सुधार एवं जीवनीय शक्ति बढ़ाने के लिए खान मजदूर सुरक्षा संगठन के सहयोग से डांग विकास संस्थान ने प्रेरणादायी अभिनव पहल के रूप में विशेष औषधियों के मिश्रण से खनिकप्राश तैयार किया था। प्रारंभिक चरण में करौली व धौलपुर जिलों के पांच गांवों के चिह्नित 50 सिलिकोसिस रोगियों को यह खनिकप्राश संस्थान ने नि:शुल्क वितरण किया।

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दो माह बाद रोगियों की पुन: स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट में अपेक्षानुरूप फायदा मिलने पर अब संस्थान ने फिर से 100 किलोग्राम खनिकप्राश तैयार कराया है। सचिव डॉ.विकास भारद्वाज के अनुसार इसका सेवन खासकर अक्टूबर से मार्च माह के बीच रोगी को भोजन से पहले प्रात: व सायं को एक चम्मच बकरी के दूध के साथ करना होता है। इसमें रसायन औषधि होने से पोषण के साथ रोगियों की श्वसन प्रणाली को ताकत मिलती है और खांसी व श्वांस में खास लाभ होने से जीवनीय शक्ति में वृद्धि भी होती है।

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गौरतलब है कि पेट की खातिर खानों में पत्थर पर वार करने वाले खनिकों की की सांस पर सिलिकोस बीमारी का प्रहार हो रहा है। हालांकि सिलिकोसिस से हांफती जिंदगी व आश्रितों की सिसकती सांसों को संवारने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप के बाद अब शासन-प्रशासन भी गंभीर है। डांग के खनन क्षेत्र में विकास के साथ खनन श्रमिकों को स्वास्थ्य,सुरक्षा व मूलभूत अधिकारों के साथ योजनाओं से लाभांवित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास जारी है। वहीं खदानों की खाक छानते सिलिकोसिस जैसी लाईलाज बीमारी से ग्रसित श्रमिकों की असामयिक दम तोड़ती जिंदगी और आश्रितों की सिसकती सांसों की तकलीफ को डांग विकास संस्थान ने बखूबी महसूस किया है। सचिव डॉ.विकास भारद्वाज ने बताया कि खान मजदूर सुरक्षा संगठन के सहयोग से खनिकप्राश बनाया।

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इन जड़ी-बूटियों से बनाया खनिकप्राश खनिकप्राश बनाने में आंवला के साथ पाटला, अरनी, गंभारी, बिल्व, श्योनाक, गोखरू, स्यालपरनी, पृष्ठपरनी, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी (दशमूल), वनौषधि में पीपल, काकड़ा सिंगी, मुनक्का, द्रक्षा, ग्लोय, हर्ड, खरेंटी, भूमि आंवला, अडूसा, जीवंती, कचूर, नागर मोथा, पुष्कर मूल, कऊआ ठोड़ी, मूंगपरनी, माषपरणी, बिदारीकंदी,  सांठी, कमलगट्टा, छोटी इलायची, अगर, चंदन, तगर तथा न्यूट्राशंस के रूप में जीवनीयगण (अष्ट,वर्ग)में रिद्धि, वृद्धि, मेदा, महामेदा, जीवक, रिष्भक,कांकोली,क्षीरकाकोली, शतावरी, चीनी,गाय का देशी घी,तिली का तेल तथा प्रेक्षप द्रव्य में पीपल, बंदसिलोचन, दालचीनी, इलायची, नागकेसर, तेजपात व केसर का इस्तेमाल किया है। आयुर्वेद के चरक संहिता से लिया खनिकप्राश का नुस्खा आयुर्वेद के चरक संहिता ग्रंथ में वर्णित सूत्र कास श्वांस रोग अधिकार सूत्र से खनिकप्राश बनाने का नुस्खा लिया है।

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आंवला,जियोश्यामक वात,पित्त,कफ को संतुलित करता है,इसलिए आयुर्वेद में अमृत माना है। सिलिकोसिस रोगियों में जीवनीय शक्ति बढ़ाने के लिए 55 प्रकार की जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष औषधि का डांग विकास संस्थान ने खनिकप्राश नाम दिया। यह हर्बल मेडिसन (औषधि) श्रीकृष्णगोपाल आयुर्वेद धर्मार्थ ट्रस्ट कालेड़ा के वैद्य डॉ.दिनेशचंद शर्मा (भीलवाड़ा) और इंडियन मेडिसन बोर्ड ऑफ राजस्थान सरकार से अ श्रेणी में पंजीकृत संस्थान के सचिव डॉ.विकास भारद्वाज की देखरेख में 13 घंटे में तैयार की गई। इन रोगियों को यह हुआ फायदा करौली के गांव मदनपुर के छिंगा,सुरेश,चेतराम कोली,भगवंता गुर्जर,मामचारी के राजूलाल,बत्तीलाल,राजौर के रामस्वरूप व हरिलाल,अमरचंद करसाई तथा धौलपुर के समथुरा तहसील के गांव हरलालपुरा के चिरंजी,रामेश्वर व होरीलाल भिंडीपुरा,मोहरसिंह चुरारीकला,चुरारी के रामफल,भगवानसिंह व शिवचरण आदि के पुन: स्वास्थ्य परीक्षण में दो माह के भीतर तीन से पांच किलो बजन बढ़ा है।

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वहीं 35 रोगियों में हीमोग्लोबिन बढ़ने,श्वसन गति प्रति मिनट कम होने, शरीर में स्फूर्ति व ताजगी के कारण चलने व कार्य करने की क्षमता में वृद्धि, नाडी व श्वसनतंत्र में सुधार के साथ कफ व बुखार में कमी होना पाया है। करौली-धौलपुर के इन गांवों के रोगियों को फ्री दिया खनिकप्राश सिलिकोसिस उन्मूलन के क्षेत्र में कार्यशील डांग विकास संस्थान के सचिव एवं राज्य मानवाधिकार आयोग के खान मजदूर कोर ग्रुप के सदस्य विकास भारद्वाज ने बताया कि खनिकप्राश को 2 किलोग्राम वजनी डिब्बा में पैक किया।

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करौली के गांव मामचारी,करसाई,राजौर,मदनपुर व लखनीपुर तथा धौलपुर के सरमथुरा तहसील के गांव भिंडीपुरा, कोनेसा, चुरारी, हरलालपुरा, डोमपुरा में सिलिकोसिस प्रभावित व सहायता प्राप्त 25-25 रोगियों के स्वास्थ्य की जांच करने के बाद सौ किलो खनिकप्राश नि:शुल्क देकर लाभांवित किया। इससे पहले भी रोगियों को सोयाबीन व मिल्क पावडर जैसा न्यूट्रीशियन आहार दे चुके हैं। इनका कहना है सिलिकोसिस रोगियों की जीवनयीय शक्ति बढ़ाने के लिए हमने खनिकप्राश रोगियों को नि:शुल्क बांटा। इसका सेवन करने वाले रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तो सुखद परिणाम सामने आए हैं।

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