राजस्थान : भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, रोगियों से लूट, निजी अस्पतालों को छूट

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  • दिलीप बीदावत                                                                                                                                             

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को राजस्थान में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा नाम दिया गया है तथा इसकी क्रियान्विति भामाशाह प्लेटफार्म से की जा रही है। सभी खाद्य सुरक्षा के लाभार्थाी व राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड धारकों को इस योजना के अंतर्गत कवर किया जा रहा हैं। गरीबों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण यह योजना जानकारी के अभाव, सरकार के प्रचार-प्रसार की कमी, स्वप्रेरणा से सूचना प्रदर्शन, निगरानी की कमी एवं शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी नहीं होने के कारण लोगों का लाभ लेने में समस्याएं आ रही है।

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 कुछ निजी अस्पतालों केे लिए यह लूट का जरिया बन गई है। जिला स्तर पर इस योजना की निगरानी एवं रोगियों को परेशानी आने पर किससे संपर्क करें, यह खुलासा नहीं होने केे कारण रोगी अपने ईलाज का जेब से भी पैसा खर्च कर रहे हैं तथा निजी अस्पताल बीमा कंपनी से भी भुगतान प्राप्त कर रही है। यह सही है कि इस योजना से प्रदेश में लाखों गरीब परिवारों को ईलाज पर होने वाले खर्च से बड़ी राहत मिली है। निशुल्क दवा के बाद प्रदेष के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों, अंत्यौदय, स्टेट बीपीएल सहित खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम से जुड़े उन सभी गरीब श्रेणी, जिसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मुक्त हुए बंधुआ मजदूर, भूमिहीन कृषक, श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक, महात्मा गांधी नरेगा में 100 दिन की मजदूरी करने वाले परिवार, आवासहीन, कथौड़ी व खेरवा जनजाति के परिवारों को खाद्य सुरक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। जाहिर है, यही परिवार भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के भी लाभार्थी हैं। सामान्य बीमारी में तीस हजार से गंभीर बीमारी में तीन लाख तक के ईलाज का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किए जाने के प्रावधान से प्रदेश के लाखों व्यक्तियों को राहत मिली है और मिल रही है।

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1715 बीमारियों के कवरेज वाली इस योजना में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 4.5 करोड़ लोगों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में कवर किया गया है तथा 17.5 लाख लोगों का केसलेश ईलाज हुआ है। योजना के तहत खाद्य सुरक्षा लाभार्थियों के भामाशाह कार्ड में दर्ज परिवार सदस्यों के नामों में से कोई सदस्य बीमार होने पर सरकारी एवं चिन्हित निजी अस्पतालों में भर्ती होने की स्थिति में सामान्य बीमारी के 30 हजार तथा गंभीर बीमार के लिए तीन लाख तक का केसलेश ईलाज के प्रावधान वाली इस योजना की क्रियान्विति से जुड़ी कुछ खामियों के कारण लाभार्थियों को लाभ लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानियां लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में ईलाज कराने से आ रही है। निजी अस्पतालों में ईलाज के लिए रोगियों से भी पैसा वसूला जा रहा है। भामाशाह स्वास्थ्स बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार विभाग द्वारा आदेश जारी कर यह सूचित किया गया है कि योजना के लाभार्थियों से ईलाज के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। आदेश में जरूरतों की पूर्ति किस मद से की जानी है, इसका भी उल्लेख है। यहां तक कि अस्पताल में दवा उपलब्घ नहीं होने पर मार्केट से क्रय करने के निर्देष के बावजूद लाभार्थियों से ईलाज के लिए दवाओं, जांच आदि के पैसे लिए जा रहे हैं।

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इस योजना का प्रचार-प्रसार बहुत कम हुआ है। लाभार्थियों के नजरिए से देखें तो प्रचार-प्रसार नहीं के बराबर है। योजना का सामान्य प्रचार-प्रचार एक बात है, लेकिन लाभ लेने की प्रक्रिया, निजी अस्पतालों व उनके द्वारा लिए गये पैकेजों की जानकारी, जिला व राज्य निगरानी तंत्र, समस्या निवारण तंत्र की जानकारी अस्पतालों में चस्पा नहीं होने केे कारण लोग इस योजना का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
जुड़ाव योग्य लाभार्थी वंचित रह रहे हैं
सरकार द्वारा एनएफएसए एवं श्रम विभाग में निर्माण, सन्निर्माण श्रमिकों को इस योजना का लाभार्थी माना है। जीमीनी स्तर पर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण बहुत से योग्य परिवार आज भी खाद्य सुरक्षा लाभ से वंचित हैं जब कि बहुत से अपात्र परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं। ग्राम पंचायत की कुल आबादी का 69 प्रतिषत तक खाद्य सुरक्षा लाभार्थियों तक सीमित रखने की सीमा के कारण नए लाभार्थियों केे जुड़ाव का प्रावधान होने के बावजूद उन्हें शामिल करने की कार्यवाही नहीं हो रही है। खाद्य सुरक्षा एक्ट केे अनुसार ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि पात्र लोगों को वंचित रखा जाए।

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अपारदर्शी और गैर सहभागी तरीके से हुई लाभान्वित चयन प्रक्रिया पूरी तरह से ग्राम सचिव एवं ग्राम पंचायत स्तरीय कार्मिकों की दया पर निर्भर होने केे कारण अयोग्य लोगों की भरमार से 69 प्रतिशत कवरेज का कोटा पूरा हो गया। हालांकि सरकार द्वारा जारी आदेष के अनुसार खाद्य सुरक्षा जुड़ाव योग्य परिवार निर्धारित प्रपत्र में अपनी जानकारी एवं योग्यता का प्रमाण पत्र सलंग्न कर उपखंड अधिकारी या जिला रसद अधिकारी को अपील कर सकते हैं। लेकिन इन अपीलों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है और ना ही अपीलार्थी को योग्य या अयोग्य होने की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। बाड़मेर जिले की बड़नावा जागीर ग्राम पंचायत के 18 योग्य परिवार पिछले एक साल से उपखंड अधिकारी, जिला रसद अधिकारी, जिला कलक्टर, राजस्थान संपर्क पोर्टल तक में अपील एवं षिकायतें दर्ज करा चुके हैं लेकिन इन परिवारों को आज तक जोड़ा नहीं गया है। प्रदेश में लाखों की संख्या में खाद्य सुरक्षा योग्य परिवार वंचित हैं जिन्हें खाद्य सुरक्षा केे अतिरिक्त भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं जब अपीलेट ऑथोरिटी ने अपीलार्थियों से जुड़ाव के लिए अयोग्य लाभार्थियों के नाम कटवाने की शर्त सामने रख दी।

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यही स्थिति हिताधिकारी योजना केे तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की है। सरकारी आदेशानुसार हिताधिकारी में पंजीकृत श्रमिकों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभार्थी माना जाकर उन्हें भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए बनी है। लेकिन हिताधिकारी योजना में पंजीकृत सभी श्रमिकों को खाद्य सुरक्षा श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इन सभी श्रमिकों के पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा का पुराना कार्ड भी नहीं है, जिससे इन्हें भामाशाह स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सके।
निगरानी व नीरीक्षण के अभाव में निजी अस्पतालों की लूट

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भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ या इसकी आड़ में निजी अस्पतालों की बले-बले है। निगरानी तंत्र की कमजोरी कहें या मिलीभगत, निजी अस्पतालों में मरीजों से ईलाज, जांच, बैड चार्ज, दवाओं आदि के नाम पर कुछ पैसे रोगी से वसूलती है तथा उधर बीमा कंपनी से क्लेम उठा रही है। बाड़मेर जिले में निजी अस्पतालों का यह गौरखधंधा धड़ले से चल रहा है। बहुत से ऐसे मामले सामने आए हैं जब रोगी के परिजनों द्वारा भामाशाह का कार्ड दिखाने पर कहा गया कि एक बार ईलाज चालू कराओ, फिर देख लेंगे। बाद में रोगी को यह कहते हुए बिल थमा दिया कि इस बीमारी का पैकेज हमारी अस्पताल ने नहीं लिया है। हार कर परिजनों को ईलाज का पैसा देना पड़ा। हाल ही जोेधपुर जिले की एक निजी अस्पताल में रोगी को यह कहते हुए भर्ती किया गया कि भामाशाह की सीडिंग बाद में हो जाएगी, पहले रोगी का ईलाज चालू कराओ। तीन दिन बाद छुट्टी के समय रोगी के परिजनों को बताया कि भर्ती व ईलाज चालू कराने से पूर्व ही सीडिंग होनी थी। रोगी के परिजनों के कहने पर मैंने स्वयं डॉक्टर से बात की, तो पहले उन्होंने बताया कि भामाशाह से मोटी बीमारी का ईलाज होता है। इनका तो सामान्य ईलाज है। जब डॉक्टर को बताया कि सामान्य बीमारी के लिए भी तीस हजार तक प्रावधान है, तो उनका जवाब था कि रोगी को पहले कार्ड बताना था। रोगी भामाशाह काउंटर पर तीन दिन से कार्ड दिखा रहा था, लेकिन काउंटर पर किसी ने नहीं सुनी। हार कर रोगी के परिजनों को पूरा भुगतान करना पड़ा।

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निजी अस्पतालों का यह गौरखधंधा लोगों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की पूरी जानकारी नहीं होने, जिला स्तर पर निगरानी एवं ग्रिवेंस तंत्र के निष्क्रिय होने के कारण चल रहा है। राजस्थान हैल्थ एश्योरेन्स ऐजेंसी, स्वास्थ्य भवन जयपुर से जारी एक आदेश के अनुसार निजी अस्पतालों की निगरानी व निरीक्षण के लिए एक कमेटी का गठन किया जाना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारी एवं सरकार द्वारा अधिकृत इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि इस कमेटी के सदस्य होंगे। कमेटी की मौजूदगी के बावजूद निजी अस्पतालों में रोगियों से पैसा वसूलने जैसी घटनाओं पर गौर नहीं किया जाना इसकी सक्रियता को दर्शाता है।
शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी नहीं
अब आधार लिंक करवाने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2018

शिकायत निवरण तंत्र के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना क्रियान्वयन विभाग द्वारा जारी एक अन्य आदेश के अनुसार शिकायत निवारण तंत्र की जिला, राज्य एवं अपीलीय ऑथोरिटी जैसी त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई है। राजस्थान संपर्क पोर्टल के टॉलफ्री नंबर 18001806127 एवं 181 पर दर्ज शिकायतों को जिला स्तर पर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी जिसमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलक्टर द्वारा नामित लेखाधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी सदस्य होंगे, को भेजी जाएगी, जिसका 30 दिन की समयावधि में निस्तारण करना है। नियत समय में निवारण नहीं होने पर शिकायत राज्य स्तरीय कमेटी को प्रेषित की जाएगी। इसके बाद भी निस्तारण नहीं हाता है, तो अपीलीय ऑथोरिटी के समक्ष अपील दायर की जा सकेगी। शिकायत निवारण तंत्र की लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण शिकायत नहीं कर पाते हैं तथा अपने साथ हो रहे अन्याय को सहन कर रहे हैं।

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जिला स्तरीय स्वास्थ्य समितियों को इसकेे प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिवर्ष बजट का प्रावधान किया गया है। लेकिन जरूरत की सूचनाओं व जानकारी का प्रचार-प्रसार नहीं किया जाकर, केवल योजना के बारे में फलैक्स चार्ट बनाकर लगा दिए गए हैं। निजी अस्पतालों के चयन की जानकारी, निगरानी समिति, शिकायत निवारण समिति, शिकायत के टोल फ्री नंबर, अस्पताल द्वारा लिए गए पैकेज आदि जरूरी सूचनाएं सरकारी व निजी दोनों अस्पतालों में प्रदर्शित नहीं होने के कारण लोग अपने साथ हो रहे अन्याय को चुपचाप सहन कर घर बैठ जाते हैं। देश के सभी प्रांतों के मुकाबले भामाशाह स्वास्थ्य बीमा की अच्छी कवरेज के बावजूद इस योजना में बहुत से सुधारों की जरूरत महसूस हो रही है।
सुधार के बिंदु
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जिला स्वास्थ्य समितयिों को प्रचार – प्रसार के लिए सूचनाएं प्रदर्शन करने के लिए निर्देश दिए जाएं कि जिले में कौन से निजी अस्पताल चिन्हित किए गए हैं तथा पैकेज सहित जानकारी, निगरानी समिति, शिकायत निवारण समिति, संपर्क पोर्टल नंबर प्रत्येक सरकारी एवं निजी सभी अस्पतालों, पीएचसी, सीएचसी एवं गंाव स्तर पर उप स्वास्थ्य केंद्रों में सदृश्य स्थान पर चस्पा किए जाएं तथा निजी अस्पतालों में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में चिन्हित होने, किन बीमारियों के पैकेज लिए गए हैं, यह सूचना प्रदर्शन होने से लाभार्थियों कोे लाभ होगा।3 हजार साल पुराने मसाले पीपली से होगा कैंसर का इलाज: शोध

जिला शिकायत निवारण समिति के अतिरिक्त ब्लॉक स्तरीय निगरानी तंत्र एवं शिकायत निवारण तंत्र स्थापित हो जिससे लाभार्थियों को परेशानी आने पर तुरंत कार्यवाही होने से सुधार की संभावना बनेगी। संपर्क पोर्टल के अतिरिक्त भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की शिकायतों के निवारण के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर किसी अधिकारी की नियुक्ति हो एवं सप्ताह में एक बार जन सुनवाई जैसी व्यवस्था हो।
अस्पताल की लापरवाही या गैर जिम्मेदारी के कारण किसी योग्य लाभार्थी को लाभ से वंचित होना पड़ा है, एसी शिकायतों की त्वरित जांच होकर, उक्त लाभार्थी को लाभ का भुगतान हो तथा इस भुगतान की भरपाई उस चिकित्सालय से वसूल करने जैसा प्रावधान हो। किसी लाभार्थी को योग्यता के बावजूद लाभ से वंचित रखने का मामला सीधे उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। सरकार चुंकि बीमा कंपनी को प्रिमियम देती है एवं अस्पतालों ने उसके एवज में सेवाएं देने का करार किया है तो राज्य सरकार द्वारा उपभोक्ता कानून के तहत अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कराए।

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जिन रोगियों का ईलाज हुआ है उनकी नाम एवं खर्च की जानकारी विभाग की वेबसाइट पर पब्लिक डॉमिन में डाली जाए ताकि लाभार्थी स्वयं भी देख सके कि उसके ईलाज पर हुए खर्च का कितना पैसा बीमा कंपनी द्वारा भुगतान किया गया है।
योजना का प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यम जैसे टीवी, रेडि़यो, वॉइस एसएमएस, सचित्र फलैक्स चार्ट, नुकड़ नाटक आदि तरीको से किया जाए। इससे लोगों को जानकारी मिल सकेगी तथा वे जागरूक होकर स्वयं अपने साथ हो रहे अन्याय का मुकाबला कर पाएंगे। (लेखक राष्ट्रीय अंर्तराष्ट्रीय मामलों के जानकार है)

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