राजस्थान: पहली बार सबसे कम वजन के जन्मजात हृदय रोगी नवजात शिशु की कार्डियक इन्टरवेशन द्वारा जान बचाई

0

मात्र 1.8 किलोग्राम के शिशु के हृदय के उपचार के लिए विशेष आकार के बलून और वायर का किया उपयोग

जयपुर। फाॅर्टिस एस्कार्ट्स हाॅस्पिटल, जयपुर शिशु हृदय रोग चिकित्सा के उत्कृष्ट केन्द्र द्वारा राजस्थान में सबसे कम वजन के हृदय रोग से पीड़ित शिशु का उपचार कर जान बचाई गई। डाॅ. संजय खत्री एडीशनल डायरेक्टर, शिशु रोग फाॅर्टिस एस्काॅर्ट्स हाॅस्पिटल जयपुर के नेतृत्व में शिशु ह्रदय रोग चिकित्सकों की टीम ने कार्डियक इन्टरवेशन ( बलून पल्मोनरी वॉल्वोटॉमी ) प्रक्रिया द्वारा इस शिशु का उपचार कर इसे जीवनदान दिया।
पढ़ें: – आखिर आपका आधार कार्ड कहां-कहां हुआ इस्तेमाल, ऐसे जाने

झुंझुनूं निवासी रघुवीर अपने शिशु को लेकर फाॅर्टिस एस्काॅर्ट्स हाॅस्पिटल जयपुर आए। शिशु की श्वास असामान्य थी और उसका वजन मात्र 1.8 किलोग्राम ही था। जांच में पाया गया कि शिशु के हृदय से फेफड़ों तक रक्त ले जाने वाले मार्ग में अवरोध है जिस कारण हृदय पर दबाव पड़ रहा था। रक्त परिवहन सुचारू नहीं होने के कारण आॅक्सीजन की मात्रा असामान्य हो गई थी और शिशु की श्वास गति काफी तेज थी। इस परिस्थिति में कार्डियक इन्टरवेशन द्वारा हृदय से फेफड़ों तक रक्त प्रवाहित करने वाले मार्ग में आए अवरोध को हटाना ही एकमात्र उपाय बचा था।
मधुमेह पर छठा राज्यस्तरीय अधिवेशन 6 व 7 जनवरी को बीकानेर में

डाॅ. संजय खत्री ने बताया ‘‘पिछले कुछ दशकों में शिशु हृदय रोग के क्षेत्र में कई आधुनिक तकनीकं आ गई हैं, जिससे जन्मजात हृदय रोग की जांच एवं उपचार भी बेहतर हुए हैं, यहां तक कि जन्म से पूर्व भी शिशु के हृदय की जांच किया जाना संभव हो गया है। राजस्थान में पहली बार इतने कम वजन के नवजात शिशु की जन्म से कुछ ही हफ्तों में बलून पल्मोनरी वॉल्वोटॉमी कर जान बचाई गई है। शिशु का वजन कम होने और हृदय का आकार छोटा होने के कारण इस प्रक्रिया में विशेष कुशलता के साथ ही विशेष आकार के बलून एवं केथेटर की आवश्यकता थी। इस कार्य में डॉ सत्यन के हेमराजनी, नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ सुनील गुप्ता, शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ एवं डॉ चेतना शिशु निश्चेतन विशेषज्ञ, फोर्टिस, जयपुर की एक समग्र टीम के सहयोग से बिना किसी चीरफाड़ के शिशु के हृदय से फेफड़ों तक लाने वाले मार्ग में अवरोध को हटाया गया और एक ही दिन में उसका उपचार कर अस्पताल से छुट्टी देदी गई।
IRCTC से आधार लिंक करने पर अब पाएं 10,000 रुपए कैश और फ्री में रेल टिकट

दुर्भाग्यवश आज भी हमारे देश में काफी तादाद में शिशुओं में जन्मजात हृदय विकृतियां पाई जाती हैं, जिनमें से जानकारी एवं इलाज के अभाव के कारण कई शिशुओं की मृत्यु तक हो जाती है। वर्तमान तकनीकी सुविधाओं एवं कुशल चिकित्सकों के प्रयासों से गंभीर परिस्थितियों में सही समय पर उपचार कर इस प्रकार के शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। जन्मजात हृदय रोग के प्रति जागरूकता की नितान्त आवश्यकता है और अधिकांश मेडिकल परिस्थितियों में इसका इलाज संभव है।

तंबाकू उत्पादेां पर 85 सचित्र चेतावनी निरस्त करना युवा पीढ़ी के लिए नुकसानदायक

डॉ श्रीकांत स्वामी, मेडिकल डायरेक्टर, फाॅर्टिस एस्काॅर्ट्स हाॅस्पिटल, जयपुर ने कहा ‘‘ फाॅर्टिस जयपुर में शिशु हृदय रोग के उपचार के लिए समर्पित विभाग है जिसमें कुशल शिशु हृदय शल्य चिकित्सक, शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ , शिशु निश्चेतन विशेषज्ञों की निपुण एवं समग्र टीम है। हमारे शिशु हृदय रोग विभाग ने राज्य में सबसे कम वजन के शिशु की जान बचा कर एक और कीर्तिमान कायम किया है, और एक बार फिर से अपनी कुशलता का परिचय दिया है। पिछले 10 वर्षों में शिशु हृदय रोग विभाग द्वारा फोर्टिस जयपुर में 3000 से अधिक बच्चो के हृदय रोगो का उपचार किया जा चूका है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक 1000 शिशुओं में करीब 6-8 शिशु जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद से लेकर एक वर्ष की अवधि के भीतर उपचार की आवश्यकता होती है। सही समय पर उपचार द्वारा जन्मजात हृदय रोगी शिशुओं की मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पढ़ें: -मोबाइल उपभोक्ता इस तरह से आधार से लिंक करें अपना मोबाइल नंबर

इंडिया इंडस्ट्रीयल फेयर-2018 उद्योग दर्शन का उद्घाटन : स्टार्टअप के माध्यम से युवा बनें उद्यमी : कटारिया

स्टार्टअप के माध्यम से युवा बनें उद्यमी : कटारिया

पाइएहर खबर अपने फेसबुक पर।   likeकीजिए  hellorajasthan का Facebook

Leave a Reply