बीकानेर : उग्र हुई किसान आंदोलन की लपटें, व्यापक रहा चक्का जाम

– जयनारायण बिस्सा

बीकानेर। किसानों की कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किए जाने तथा केन्द्र सरकार की नीतियों में किसानों को राहत दिए जाने के मांग को किसान आंदोलन की लपटें बुधवार को बीकानेर में भी उठती दिखाई दी। आंदोलन कारी किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना रोष जाहिर करने के लिये समूचे जिले में जयपुर,जैसलमेर,श्रीगंगानगर राजमार्गाे समेत तीन सौ ज्यादा जगहों पर चक्काजाम कर दिया। सुबह सवेरे ही दल बल के साथ चक्का जाम के लिये निकल पड़े किसानों के जत्थों ने बीकानेर से जुड़े राजमार्गो पेड़,झाडिय़ा,लोहे की एंगेले,पत्थर और पट्टियों के टुकडे डाल दिये तथा टायर जलाकर जाम लगा दिया। चक्काजाम को सफल बनाने के लिये अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारी अलग-अलग जगहों पर मोर्चा संभाले हुए थे,इनके साथ युवाओं और छात्रनेताओं की टोलियां भी शामिल रही। चक्काजाम के दौरान राजमार्गो पर वाहनों की लंबी कतारे लग गई।

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किसानों के चक्काजाम बीकानेर के अलावा  चूरू, झुंझुनूं, जयपुर, नागौर,श्रीगंगानर जिलों पर असर पड़ा,इन जिलों से आने वाले वाहनों का आवागमन हो जाने पर राजमार्ग खाली-खाली से नजर आया और आंदोलनकारी किसानों और पुलिस के वाहन ही दौड़ते नजर आये। जानकारी के अनुसार राजमार्गो समेत तीन सौ जगहों  चक्का जाम से करीब 3500 वाहन और 16 हजार लोग रास्तों में अटक गए। किसानों ने मांग पूरी नहीं होने तक जाम जारी रखने का ऐलान किया है। अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष गिरधारी महिया ने कहा कि बुधवार को दो बजे बजे जयपुर में एकबार फिर राज्य सरकार और किसानों के बीच वार्ता हो रही है,अगर यह वार्ता भी विफल रही तो किसान आंदोलन तेज कर दिया जायेगा और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

कलक्टरी में जारी रहा महापड़ाव

आंदोलन के तहत कलक्टरी में किसानों का महापड़ाव बुधवार को बारहवें दिन भी जारी। हालांकि महापड़ाव में ज्यादा भीड़ नहीं रही लेकिन बुढे-बुजुर्ग किसान महापड़ाव में अपनी आवाज बुलन्द करते रहे। महापड़ाव शामिल किसानों की सेवादारी के लिये युवाओं की एक टीम पर मौके पर तैनात रही।

शहर में निकले युवाओं के दल ने उड़ाई पुलिस की हवाईयां 

किसान आंदोलन के चलते बुधवार दोपहर बाद राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते शहर में निकले युवाओं के दल ने पुलिस-प्रशासन की हवाईयां उड़ा दी। करीब दो-ढाई सौ की तादाद में पैदल ही निकले इन युवाओं ने पहले महापड़ाव स्थल पर नारेबाजी कर माहौल को गूंजा दिया,फिर पैदल ही विरोध प्रदर्शन के लिये निकल पड़े तथा पब्लिक पार्क में एक ठेले को भी तहस नहस कर दिया। हालांकि पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों का जाब्ता इनके पीछे निगरानी में चल रहा था,इसके बावजूद भी युवाओं की यह टोली शहर में उग्रता का प्रदर्शन करती रही। इन्होने जूनागढ के सामने भी जाम लगाकर वाहन रोक दिये,इसके बाद केईएम रोड़ पर हंगामा करते हुए स्टेशन रोड़ होते हुए रानी बाजार पहुंच गये। बताया जाता है कि युवाओं के इस दल में कोई बड़ा नेता शामिल नहीं होने के कारण यह लोग बेकाबू अंदाज में विरोध प्रदर्शन नजर आये। मजे कि बात यह रही इनकी निगरानी के लिये तैनात पुलिस भी मूकदर्शी बनी नजर आयी। प्रदर्शनकारी युवाओं की भीड़ में शामिल फितरती तत्वों ने केईएम रोड़ पर राहगीरों से झड़प माहौल बिगाडऩे का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने बीच-बचाव कर शांत करवा दिया।

बैकफुट पर नजर आयी पुलिस

चक्का जाम के दौरान जिले में राजमार्गो समेत जगह-जगह लगाये गये जाम के दौरान किसानों का उग्र अंदाज देखकर पुलिस भी बैकफुट पर नजर आयी। नौरंगदेसर और पलाना के पास भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद किसानों के चक्का जाम से माहौल तनावपूर्ण हो गया। चक्का जाम से राजमार्ग के दोनों तरफ  चार-चार किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने किसान नेताओं से समझाइश कर जाम हटानेे का प्रयास किया, लेकिन अपनी जिद्द पर अड़े किसान नहीं माने। पलाना के पास तो किसानों ने पुलिस बल को मौके से दूर खदेड़ दिया,ऐसे ही हालात गजनेर रोड़ पर कावनी फांटे के पास नजर आये जहां राजमार्ग पर टायर जलाकर जाम लगाये खड़े किसानों को हटाने के बजाय पुलिस बल के जवान मूकदर्शी बने रहे। जयपुर रोड़ बाईपास पर जाम लगा रहे किसानों को हटाने के लिये पहुंची पुलिस के साथ भी किसानों की टकराहट हो जाने से एक बारगी माहौल गरमा गया और लेकिन हालात बेकाबू होते इससे पहले ही किसान नेताओं ने माहौल शांत करवा दिया।

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सड़क पर बिखेर दिया हजारों लीटर दूध

आंदोलनकारी किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना रोष जाहिर करने के लिये बुधवार को पलाना में राजमार्ग पर चक्का जाम के दौरान हजारो लीटर दूध सड़क पर बहा दिया,इस दरम्यान राजमार्ग दूध की दरियां में तब्दील नजर आया,आंदोकारी किसानों ने मौके पशु भी लाकर छोड़ दिये। मौके पर आंदोलनकारियों की भीड़ में शामिल आक्रोशित अंदाज में किसानों ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि जिस तरह दूध बहाया है उसी तरह हम खून बहाने से भी पीछे नहीं हटेगें। हमारे न्यूज रिपोर्टर के मुताबिक पलाना के पास चक्काजाम के दौरान किसान आंदोलन से जुड़ा कोई बड़ा नेता मौके पर मौजूद नहीं होने के कारण युवा किसानों ने खासी उग्रता दिखायी।

 किसी पार्टी का नहीं,किसानों का आंदोलन

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बीकानेर में उग्र हुए किसान अंादोलन में किसी भी राजनैतिक दल या जाति विशेष के संरक्षण से इंकार करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष गिरधारी लाल महियां ने कि किसान आंदोलन के पीछे कांग्रेस और वामपंथी दलों का हाथ होना प्रचारित किया जा रहा है,जबकि हकीकत यह है आंदोलन की कमान पूरी तरह किसानों से संभाल रखी है,राज्य सरकार व शासन  आंदोलन को लेकर किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। आंदोलन में किसी एक जाति विशेष के नहीं बल्कि तमाम जाति-समुदाय के किसान शामिल है जो अपनी मांगों को लेकर खेत-खलिहान छोड़ कर राज्य सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिये मजबूर है,राज्य सरकार किसानों की मांगे पूरी करने के बजाय आंदोलन को लेकर जाति और वर्ग संघर्ष के हालात बनाना चाहती है। राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए यह कोशिश कर रही है,किसान राज्य सरकार के इस मंसूबे को सफल नहीं होने देगें।
छात्रों ने किया डूंगर कॉलेज के सामने प्रदर्शन
किसान आंदोलन के समर्थन में बुधवार को डूंगर कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज के सामने इक्कठा होकर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के पूर्व जिलाध्यक्ष मदन कस्वां और श्रीकृष्ण गोदारा की अगुवाई में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज के सामने कुछ देर जाम भी लगाया लेकिन थोड़ी देर में जाम हटा लिया। कॉलेज का गेट बंद करके प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर निगरानी के लिये मौके पर आरएसी और पुलिस जाब्ता तैनात रहा।

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